UP news: दिव्यांगों के लिए Prosthetics वर्कशॉप, कृत्रिम अंग बनाने की तकनीक सीख रहे प्रतिभागी
लखनऊ स्थित डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में दिव्यांगों के लिए कृत्रिम अंग बनाने की आधुनिक तकनीकों पर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। ‘कॉस्मेटिक रिस्टोरेशन प्रोस्थेसिस फॉर एम्प्यूटी’ विषय पर केंद्रित यह पांच दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यशाला सोमवार को शुरू हुई।
कार्यशाला में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान सहित सात राज्यों के प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। इनमें विद्यार्थी, प्रोस्थेटिस्ट और ऑर्थोटिस्ट शामिल हैं। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्रतिभागियों को कृत्रिम उंगली, कान और नाक जैसे कॉस्मेटिक प्रोस्थेसिस तैयार करने की बारीकियां सिखाना है। ये कृत्रिम अंग दिखने में बिल्कुल प्राकृतिक अंगों जैसे होते हैं, जिससे दिव्यांग व्यक्ति को सामाजिक जीवन में सहजता महसूस होती है।
आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक
कार्यशाला प्रबंधक डॉ. रंजीत कुमार के अनुसार, दुर्घटना या जन्मजात कारणों से अंग खोने पर व्यक्ति शारीरिक के साथ-साथ मानसिक और सामाजिक रूप से भी प्रभावित होता है। कॉस्मेटिक प्रोस्थेसिस ऐसे लोगों के जीवन में नई आशा का संचार करते हैं। इन कृत्रिम अंगों का उद्देश्य केवल कार्यक्षमता प्रदान करना नहीं है, बल्कि खोए हुए अंग की प्राकृतिक बनावट और सौंदर्य को पुनर्स्थापित करना भी है।
आधुनिक तकनीक का उपयोग
आधुनिक युग में सिलिकॉन और 3डी प्रिंटिंग तकनीक की सहायता से ऐसे प्रोस्थेसिस तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें त्वचा का रंग, बनावट और नसों तक का आभास शामिल किया जा सकता है। इससे न केवल व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि वह समाज में बिना किसी झिझक के स्वयं को प्रस्तुत कर पाता है।
