बिहार में फोरेंसिक जांच का दायरा बढ़ा, सीएम नीतीश ने 34 नए वाहनों को दिखाई हरी झंडी | Bihar forensic news
बिहार में अब अपराध की जांच के लिए घटनास्थल पर ही फोरेंसिक जांच की सुविधा का विस्तार किया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना में 34 नए चलंत फोरेंसिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन वाहनों में अत्याधुनिक जांच उपकरण लगे हैं, जिससे अपराध होने के बाद तत्काल घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू की जा सकेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 से ही राज्य में विधि व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है और अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है। इन नए मोबाइल फोरेंसिक वाहनों के लोकार्पण से आपराधिक मामलों की जांच में तेजी आएगी। पहले साक्ष्य एकत्र कर लैब भेजने में काफी समय लगता था, जिससे पीड़ित परिवारों में असंतोष रहता था। अब घटनास्थल पर ही जांच शुरू होने से न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी।
नए आपराधिक कानूनों के तहत सात साल से अधिक सजा वाले मामलों में एफएसएल जांच अनिवार्य है। राज्य में प्रतिदिन औसतन 250 एफएसएल जांच के मामले आ रहे हैं। सर्वाधिक मामलों वाले जिलों में दो-दो वाहन दिए गए हैं, जबकि अन्य जिलों में एक-एक वाहन उपलब्ध कराया गया है। कुल 34 नए वाहनों के साथ अब राज्य में चलंत फोरेंसिक वाहनों की संख्या बढ़ी है। पुलिस के लिए 50 और ऐसे वाहनों की खरीद का प्रस्ताव भी भेजा गया है।
इन वाहनों में डीएनए सैंपल कलेक्शन किट, फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट लिफि्टंग सिस्टम, साइबर फोरेंसिक टूल्स, दस्तावेज परीक्षण उपकरण, रक्त एवं अन्य शारीरिक द्रव संग्रह साधन, विस्फोटक जांच किट, ड्रग डिटेक्शन किट, उच्च गुणवत्ता वाला कैमरा और वीडियो डॉक्यूमेंटेशन सिस्टम जैसे उपकरण शामिल हैं।
