दरभंगा में जूनियर इंजीनियर पर निगरानी का शिकंजा, MNREGA घोटाले में 24 लाख की वसूली की सिफारिश (Bihar news)
बिहार के दरभंगा जिले में कनीय अभियंता अंसारूल हक पर निगरानी अन्वेषण ब्यूरो का शिकंजा कस गया है। उन पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप है, लेकिन जांच में उनकी करतूतों की परतें खुल रही हैं। यह मामला सिर्फ अवैध संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि मनरेगा (MNREGA) योजनाओं में बड़े पैमाने पर सरकारी राशि की लूट से जुड़ा है।
जांच में पता चला कि अभियंत्रण संगठन में कार्यरत होने के बावजूद अंसारूल हक नियमों को ताक पर रखकर दो प्रखंडों में मनरेगा योजनाओं का तकनीकी दायित्व संभाल रहे थे। गौड़ा बौराम प्रखंड के नारी पंचायत में मनरेगा योजनाओं की जांच में घोर अनियमितता सामने आई है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा) और कार्यपालक अभियंता की संयुक्त जांच रिपोर्ट में 24 लाख रुपये की पांच योजनाओं में अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018-19 के दौरान बने पक्के नाले निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। मापी पुस्तिका में स्लैब की मोटाई वास्तविक कार्य से अधिक दर्शाई गई थी। निर्माण कार्य में स्लोप मेंटेन नहीं किया गया, जिससे जल निकासी पूरी तरह बाधित हो गई और नाले अनुपयोगी साबित हुए। कई योजनाओं में प्राक्कलन स्थल के अनुरूप नहीं बनाए गए थे, और सामग्री ढुलाई में निर्धारित दर से अधिक दर दर्शाई गई।
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जल निकासी न होने के कारण योजनाएं व्यर्थ हो गईं और सरकारी राशि का दुरुपयोग हुआ। मनरेगा अधिनियम का खुला उल्लंघन सामने आया है। रिपोर्ट में कुल भुगतान राशि 23 लाख 66 हजार 470 रुपये की शत प्रतिशत वसूली की सिफारिश की गई थी। इसमें कनीय अभियंता अंसारूल हक के साथ-साथ मुखिया, पंचायत रोजगार सेवक और अन्य अधिकारियों से समान रूप से राशि वसूली की अनुशंसा की गई थी। हालांकि, जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।
