अरावली खनन मामले पर Supreme Court का बड़ा फैसला, पुरानी परिभाषा पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली रेंज में खनन को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने ही 20 नवंबर के आदेश पर रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अरावली की नई परिभाषा को लेकर कई विरोधाभास हैं, जिन्हें दूर करना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि अरावली की परिभाषा को संकुचित करके संरक्षण क्षेत्र को सीमित किया जा रहा है, जिससे खनन के लिए अधिक क्षेत्र खुल सकते हैं।
कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि क्या 500 मीटर के क्षेत्र तक अरावली की परिभाषा को सीमित करने से संरक्षण का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा। कोर्ट ने पूछा कि क्या इससे गैर-अरावली क्षेत्रों का दायरा बढ़ जाएगा, जहां खनन की अनुमति दी जा सकती है। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी स्पष्टीकरण मांगा कि दो पहाड़ियों के बीच के बड़े गैप (700 मीटर या उससे अधिक) को कैसे माना जाएगा और इन क्षेत्रों में खनन की अनुमति दी जाएगी या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने एक उच्च-शक्ति प्राप्त विशेषज्ञ समिति के गठन का प्रस्ताव दिया है। यह समिति पहले प्रस्तुत की गई रिपोर्ट का विश्लेषण करेगी और अरावली रेंज की पारिस्थितिक अखंडता को बनाए रखने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी व्यापक खनन योजना तब तक लागू नहीं की जा सकती जब तक कि उसे कोर्ट की मंजूरी न मिल जाए। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक परामर्श भी शामिल होगा।
कोर्ट ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि नई रूपरेखा के तहत खनन को रोका जाएगा या जारी रखा जाएगा। कोर्ट ने इस आलोचना की वैज्ञानिक सटीकता पर भी सवाल उठाया कि नई परिभाषा के तहत 11,000 से अधिक पहाड़ियां खनन के लिए खुल सकती हैं। कोर्ट ने कहा कि इन सभी पहलुओं पर स्पष्टता आवश्यक है। मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी 2026 को निर्धारित की गई है।
