IIT कानपुर में आत्महत्या का सिलसिला जारी: 22 महीनों में 7वीं मौत, छात्र ‘कैंपस’ में असुरक्षित?
आईआईटी कानपुर एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह दुखद है। पिछले 22 महीनों में संस्थान में सात छात्रों ने आत्महत्या की है, जिससे ‘कैंपस’ में छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। पिछले 11 महीनों में ही चार छात्रों ने अपनी जान गंवाई है। हाल ही में बीटेक चतुर्थ वर्ष के छात्र जय सिंह की आत्महत्या ने इस मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
आत्महत्या के पीछे शैक्षणिक दबाव की आशंका
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जय सिंह पढ़ाई के दबाव और लगातार बैक आने से परेशान थे। उन्हें प्लेसमेंट में बैठने का मौका भी नहीं मिल रहा था। इस घटना के बाद, आईआईटी प्रशासन ने जय सिंह की एकेडमिक रिपोर्ट तलब की है ताकि आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा सके। जय सिंह ने 2020 में बीटेक में दाखिला लिया था और 2024 तक उनका पाठ्यक्रम पूरा होना था। कुछ विषयों में कमजोर प्रदर्शन के कारण ईयर बैक लगने की आशंका जताई जा रही थी।
संस्थान की छात्र सहायता प्रणाली पर सवाल
इस साल आईआईटी में यह चौथी मौत है। इससे पहले तीन छात्र और एक सॉफ्टवेयर डेवलपर भी आत्महत्या कर चुके हैं। इन लगातार हो रही घटनाओं के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या संस्थान की काउंसलिंग व्यवस्था जरूरतमंद छात्रों तक प्रभावी ढंग से पहुंच पा रही है।
प्रशासन का दावा: व्यापक इंतजाम मौजूद
आईआईटी प्रशासन का कहना है कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। संस्थान में दस प्रोफेशनल काउंसलर, जिनमें मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक शामिल हैं, 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं। इसके अलावा, तीन एम्पेनल्ड साइकियाट्रिस्ट, 24 घंटे चलने वाली ऑनलाइन हेल्पलाइन, नियमित प्रशिक्षण और हर 30 छात्रों पर एक फैकल्टी एडवाइजर की व्यवस्था है। प्रशासन ने यह भी बताया कि नए यूजी और पीजी छात्रों की पहले सप्ताह में मानसिक स्वास्थ्य जांच की जाती है और जोखिम वाले छात्रों से काउंसलर संपर्क करते हैं।
