भागवत कथा में ध्रुव-प्रह्लाद चरित्र का वर्णन, सुनीति के उपदेशों का महत्व
रूरा के अजयपुर बनीपारा गांव में चल रहे सात दिवसीय श्री विष्णु महायज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा एवं रामकथा के तीसरे दिन कथा व्यास पंकज तिवारी ने ध्रुव और प्रह्लाद के चरित्र का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि जब जीव सुनीति की उपेक्षा कर अपनी इच्छाओं के अनुसार आचरण करता है, तो वह धर्म और न्याय के मार्ग से भटक जाता है। ऐसे में मां ही अपने पुत्र को सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है।
कथा व्यास ने उदाहरण देते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद ने अपनी दूसरी पत्नी सुरुचि के कहने पर अपने पुत्र ध्रुव का तिरस्कार कर दिया था। तब मां सुनीति ने अपने पुत्र को भगवान की शरण में जाने का मार्ग दिखाया। इस मार्ग पर चलकर बालक ध्रुव ने न केवल भगवान का साक्षात्कार किया, बल्कि परमपद को भी प्राप्त कर लिया। कथा के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को अपने पुत्रों को सही राह पर चलने के लिए प्रेरित किया।
प्रह्लाद चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि जो भक्त पूर्ण समर्पण भाव से भगवान की भक्ति करते हैं, भगवान सदैव उनकी रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। इस कथा का आयोजन क्षेत्र में धार्मिकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है, जिससे आमजन को प्रेरणा मिल सके।
