बुढ़ापे में बेटों ने छोड़ा साथ, गार्ड ने फांसी लगाकर दी जान; ‘तीन-तीन बेटे, फिर भी बेसहारा…’
कानपुर में एक 50 वर्षीय गार्ड विमल कुमार की आत्महत्या ने समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विमल कुमार के तीन बेटे थे, लेकिन उन्हें हमेशा यह चिंता सताती थी कि बुढ़ापे में उनका कोई सहारा नहीं बनेगा। शुक्रवार रात घर से निकलते समय उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि उन्हें चप्पल नहीं मिल रही है, जबकि वह आत्महत्या करने जा रहे थे।
शनिवार सुबह उनका शव घर से लगभग 500 मीटर दूर एक बबूल के पेड़ पर लटका मिला। उनके बड़े बेटे जगदीप ने बताया कि पिता अक्सर बेटों के सहारे न बनने की बात कहते थे। यह घटना दिखाती है कि कैसे पारिवारिक रिश्ते टूटने पर बुजुर्गों को अकेलापन महसूस होता है।
इसी तरह की एक अन्य घटना में, फतेहपुर के विपिन पटेल ने भी पारिवारिक कलह के कारण ट्रेन से कटकर जान दे दी। उनकी पत्नी और मां दोनों ने अलग-अलग बयान दिए, जिससे पारिवारिक तनाव स्पष्ट होता है। ये दोनों घटनाएं कानपुर क्षेत्र में बढ़ते पारिवारिक संघर्षों और उनके दुखद परिणामों को दर्शाती हैं।
