अलीगढ़ एयरपोर्ट पर जवान बेहाल: 16 महीने से बैरक और टॉयलेट तक नसीब नहीं, UP News
अलीगढ़ एयरपोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है, जहां तैनात विशेष सुरक्षा बल के 76 जवान पिछले 16 महीनों से बेहद कठिन परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन जवानों के लिए न तो रहने के लिए बैरक की व्यवस्था है और न ही शौचालय व स्नानागार जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह स्थिति तब है जब मार्च 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अलीगढ़ एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन किया था और इस पर करीब 110 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव और लगातार पत्राचार
विशेष सुरक्षा बल, मथुरा की चौथी वाहिनी के ये जवान एयरपोर्ट की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं। पीएसी मुख्यालय पिछले 2025 से एयरपोर्ट के पास तीन एकड़ जमीन की मांग कर रहा है ताकि जवानों के लिए बैरक, कार्यालय, भोजनालय और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाओं का निर्माण कराया जा सके। उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल के पुलिस उपमहानिरीक्षक हेमन्त कुटियाल ने 2025 से अब तक सात बार पत्र जारी कर इस भूमि की आवश्यकता बताई है, लेकिन अब तक जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है।
एयरपोर्ट पर वर्तमान गतिविधियां और सुरक्षा खर्च
वर्तमान में अलीगढ़ एयरपोर्ट से केवल चेतक व पायनियर फ्लाइंग एकेडमी के ट्रेनी विमान ही उड़ान भर रहे हैं, जहां पायलट प्रशिक्षण ले रहे बच्चे विमान उड़ाते हैं। एयरपोर्ट की सुरक्षा पर हर महीने लगभग 45 लाख रुपये का खर्च आता है। विशेष सुरक्षा बल के जवानों को आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्टों में ड्यूटी करनी पड़ती है, और वे वर्तमान में पीएसी वाहिनी में निवास करते हैं।
एयरपोर्ट का विस्तारीकरण और भविष्य की उम्मीदें
एयरपोर्ट का विस्तारीकरण भी किया जा रहा है, जिसके लिए आसपास के क्षेत्रों से 275 हेक्टेयर भूमि खरीदी जा रही है, जिस पर 738 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह उम्मीद जताई जा रही है कि एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के साथ ही सुरक्षा कर्मियों के लिए बैरक निर्माण की दिशा में भी कदम उठाए जा सकते हैं। प्रमुख सचिव गृह (पुलिस) ने विशेष सुरक्षा बल से एयरपोर्ट की सुरक्षा कराए जाने की स्वीकृति दी थी, जिसके अनुपालन में 29 दिसंबर 2023 से ड्यूटी संपादित की जा रही है।
