UP के 4 जिलों की मिट्टी ‘बेजान’: रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से अनाज उत्पादन पर खतरा, जानें क्या है solution
रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग ने उत्तर प्रदेश के चार जिलों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। बरेली, बदायूं, पीलीभीत और शाहजहांपुर में हुए मृदा परीक्षणों में नाइट्रोजन और कार्बनिक जीवांश की मात्रा चिंताजनक स्तर तक कम पाई गई है। यह स्थिति न केवल खेती की लागत बढ़ा रही है, बल्कि भविष्य में अनाज उत्पादन पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
कृषि विभाग द्वारा चलाए गए विशेष अभियान के तहत इन जिलों से मिट्टी के नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए थे। बरेली जिले में 21,000 से अधिक नमूनों में से अधिकांश में नाइट्रोजन की कमी पाई गई, जबकि कार्बनिक जीवांश की मात्रा भी कई जगहों पर कम मिली। बदायूं जिले में तो लगभग सभी नमूनों में नाइट्रोजन नगण्य मिली और कार्बनिक जीवांश भी बहुत कम पाया गया। पीलीभीत और शाहजहांपुर जिलों की रिपोर्ट भी कुछ ऐसी ही चिंताजनक है, जहां नाइट्रोजन और कार्बनिक जीवांश की भारी कमी सामने आई है।
हालांकि, तांबे, सल्फर, बोरान, मैंगनीज और जिंक जैसे अन्य पोषक तत्वों की स्थिति इन जिलों में सामान्य पाई गई है।
संयुक्त कृषि निदेशक दुर्विजय सिंह ने इस स्थिति को ‘चिंता का विषय’ बताया है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरा शक्ति को खत्म कर रहा है और खेती की लागत बढ़ा रहा है। उन्होंने किसानों से फसल चक्र अपनाने, हरी खाद (जैसे ढैंचा और सनई) का प्रयोग करने और गोबर की खाद का अधिक से अधिक उपयोग करने की सलाह दी है।
किसानों को मृदा परीक्षण कार्ड के आधार पर ही आवश्यक उर्वरकों का प्रयोग करने और पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक तकनीक अपनाने का सुझाव दिया गया है। कृषि विशेषज्ञों और विभाग के अधिकारियों से परामर्श लेकर खेती करना लाभकारी सिद्ध होगा, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी और उत्पादन लागत में कमी आएगी।
