यूपी में गन्ना किसानों की लौटी मुस्कान, 3.22 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड भुगतान
किसी भी राज्य की प्रगति का असली पैमाना उसके किसानों के चेहरे की खुशी है, जो तभी संभव है जब विकास की केंद्रीय धुरी में गांव, खेत और किसान हों। जब राज्य की नीतियां किसान-केंद्रित होती हैं, तो यह पूरे राष्ट्र की आत्मा को सशक्त करती हैं, क्योंकि खेती केवल उत्पादन नहीं, बल्कि जीवन, संस्कृति और सभ्यता की निरंतरता का आधार है। इस परिप्रेक्ष्य में, उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में किसानों के लिए उठाए गए कदम केवल सरकारी संकल्प नहीं, बल्कि एक राज्य के समग्र विकास की दूरगामी दृष्टि का प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही किसानों का कर्ज माफ कर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी थीं। विशेष रूप से गन्ना किसानों के हित में लिए गए फैसलों ने राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बना दिया है।
आज उत्तर प्रदेश के किसान केवल अर्थव्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। यह सरकार की स्पष्ट नीयत और प्रभावी नीति का परिणाम है। इसी का नतीजा है कि उत्तर प्रदेश ने गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया है, जो देश के किसी भी राज्य द्वारा गन्ना किसानों को किया गया सर्वाधिक भुगतान है। यह गौरव राज्य के आत्मबल को दर्शाता है, खासकर तब जब एक दशक पहले प्रदेश के गन्ना किसानों की स्थिति किसी त्रासदी से कम नहीं थी।
किसानों के जीवन में आया सकारात्मक बदलाव
मिलों का बंद होना, गन्ने के मूल्य का बकाया रहना, किसानों का कर्ज में डूबा होना और सरकार द्वारा केवल आश्वासन देना – यह पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक गन्ना किसानों की एक आम पीड़ा बन गई थी। चीनी मिलों के बाहर महीनों तक गन्ने की ट्रॉलियां खड़ी रहना, गन्ने का सड़ना और किसानों का मायूस होना, यह राज्य की नियति बन गई थी। लेकिन, योगी सरकार ने संकल्प के साथ इस स्थिति को बदला है। 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लाखों परिवारों के लिए आर्थिक जीवन-रेखा साबित हुआ है। आज पश्चिमी यूपी के किसान गर्व से चीनी मिलों तक पहुंचते हैं और बताते हैं कि कैसे समय पर भुगतान मिलने से बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता समाप्त हो गई है। खेती अब सम्मान की बात बन गई है।
गन्ना मूल्य में वृद्धि और किसानों की आय
यह किसान हित में कोई एक फैसला नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया का हिस्सा है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति कुंतल की वृद्धि की गई है। यह वृद्धि असाधारण है, खासकर तब जब देश के कई राज्य उचित समर्थन मूल्य देने में संकोच करते हैं। उत्तर प्रदेश ने साबित किया है कि किसान की आय बढ़ाना केवल चुनावी वादा नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां करोड़ों कुंतल गन्ने की पेराई होती है, इस मूल्य वृद्धि का कुल आर्थिक प्रभाव अरबों रुपये में है, जिसका सीधा लाभ किसानों तक पहुंचता है। यह वृद्धि किसानों के श्रम की कीमत समझने और उनके मेहनत का मान रखने का प्रतीक है, जिससे खेती में निवेश को लेकर हिचकिचाहट कम हुई है।
सर्वाधिक गन्ना उत्पादन और बेहतर व्यवस्था
उत्तर प्रदेश आज सर्वाधिक गन्ना उत्पादन करने वाला राज्य है। यह केवल कृषि भूमि के विस्तार का परिणाम नहीं, बल्कि उन नीतियों का प्रतिफल है जिनसे किसानों को खेती में भरोसा मिला है। जब किसान को यह विश्वास होता है कि उसकी फसल का उचित दाम मिलेगा और समय पर भुगतान होगा, तो वह अधिक लगन से खेती करता है। इसके परिणाम स्वरूप, उत्तर प्रदेश अब औसत चीनी परता में महाराष्ट्र और कर्नाटक को भी पीछे छोड़ चुका है। यह खेत से मिल तक की पूरी व्यवस्था में सुधार का परिणाम है, जिसमें बेहतर बीज, वैज्ञानिक खेती, समय पर सिंचाई और मिलों की कार्यकुशलता का योगदान है। बाराबंकी के किसान पद्मश्री राम शरण वर्मा के अनुसार, सरकारी नीतियां और किसान की लगन का संगम ही इस सफलता का आधार है।
किसानों को सशक्त बनाने के अन्य कदम
किसानों की खुशहाली के लिए सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड और फसली ऋण जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई हैं, ताकि उन्हें खाद और सिंचाई के लिए साहूकारों पर निर्भर न रहना पड़े। 2024-25 से मार्च 2026 तक 2.03 करोड़ फार्मर आईडी जारी की गईं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे किसानों के खातों में पहुंचे। सरकार ने किसान को केवल सहायता का पात्र नहीं, बल्कि सम्मान का अधिकारी माना है। गन्ने का एक पौधा जब खेत में लहराता है, तो वह केवल फसल नहीं, बल्कि एक परिवार की उम्मीद होती है, और उत्तर प्रदेश में आज वह उम्मीद साकार हो रही है।
