शशि थरूर की चेतावनी: भारत को Pakistan news और उसके ‘असममित खतरे’ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भारत को पाकिस्तान की सैन्य रणनीति में हो रहे बदलावों के प्रति सचेत रहने की चेतावनी दी है। थरूर ने कहा कि पाकिस्तान की नई सैन्य रणनीति, जिसे ‘असममित प्रतिरोध’ (asymmetric deterrence) कहा जाता है, को भारत हल्के में नहीं ले सकता। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है।
थरूर ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर भी टिप्पणी की और कहा कि यह एक ‘बहुत समस्याग्रस्त’ देश है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में एक नाममात्र की नागरिक सरकार है, जिस पर सेना का वर्चस्व है। ऐसे में नीतिगत फैसलों में सेना का एजेंडा हमेशा हावी रहता है।
आर्थिक कमजोरी और सैन्य दुस्साहस
थरूर ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को ‘नाजुक’ बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था विदेशी सहायता पर बहुत अधिक निर्भर है। उन्होंने चेतावनी दी कि आर्थिक कमजोरी अक्सर सैन्य दुस्साहस को बढ़ावा देती है। थरूर ने भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना करते हुए कहा कि जहां भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत या उससे अधिक है, वहीं पाकिस्तान की वृद्धि दर केवल 2.7 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब कपड़ा और कृषि जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर रहा है, जिससे क्षेत्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है।
पड़ोसी देशों में अस्थिरता पर चिंता
थरूर ने भारत के पड़ोसी देशों में बढ़ती अस्थिरता पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश अपनी आंतरिक समस्याओं, जैसे ऊर्जा की कमी, मुद्रास्फीति और गिरते निवेशक विश्वास से जूझ रहा है। उन्होंने आगाह किया कि बांग्लादेश में अस्थिरता भारत के लिए एक ‘सॉफ्ट अंडरबेली’ बन सकती है। थरूर ने यह भी बताया कि बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौतों पर चर्चा कर रहा है, जिससे ऐसा लगता है कि वह भारत को अपना दुश्मन मानता है। उन्होंने नेपाल में सरकार के गिरने और क्षेत्र में बढ़ती भारत विरोधी भावनाओं पर भी चिंता व्यक्त की।
बदलती वैश्विक भू-राजनीति
थरूर ने वैश्विक भू-राजनीति में हो रहे बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में भूगर्भीय प्लेटें (tectonic plates) बदल रही हैं और हम अशांति के दौर में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने संबंधों का विस्तार कर रहा है और चीन तथा सऊदी अरब से समर्थन मिलने के कारण वह भारत के साथ जुड़ने की आवश्यकता कम महसूस कर सकता है।
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