लखनऊ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का ‘गौ-रक्षा धर्मयुद्ध’, प्रशासन की शर्तों पर भड़के; Shankaracharya news
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने लखनऊ में ‘गौ-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ का शंखनाद किया है। इस दौरान उन्होंने प्रशासन द्वारा आयोजन के लिए लगाई गई 26 शर्तों पर कड़ा ऐतराज जताया है। शंकराचार्य ने कहा कि वे यहां सरगम बजाने नहीं आए हैं और प्रशासन की शर्तें उनकी आवाज दबाने की कोशिश हैं। यह आयोजन गौ-रक्षा के लिए देशव्यापी रणनीति की घोषणा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन ने शंकराचार्य के इस आयोजन के लिए अनुमति तो दी है, लेकिन कई सख्त शर्तें लगाई हैं। इनमें ‘भड़काऊ भाषण न देने’ की हिदायत प्रमुख है। इस पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आपत्ति जताते हुए कहा, “जो बात हम कहने आए हैं, अगर वही नहीं कह पाएंगे तो यह सब तामझाम क्यों? वे चाहते हैं कि हम उनके मन मुताबिक बोलें, उनके लिए सरगम बजाएं, लेकिन हम इसके लिए नहीं आए हैं। हमने कभी भड़काऊ भाषण नहीं दिया, पर हमें जो बोलना है, हम वह जरूर बोलेंगे।” उन्होंने प्रशासन की इस सख्ती को अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश लगाने की कोशिश बताया है।
इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से भारी संख्या में संत समाज और गौ-भक्तों के जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए लखनऊ पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थानों की पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है। कार्यक्रम स्थल के चारों ओर अतिरिक्त पीएसी और पुलिस बल तैनात किया गया है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने लखनऊ आने से पहले काशी से यात्रा निकाली थी। इस दौरान उन्होंने जौनपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, मोहनलालगंज और नैमिषारण्य जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्रों पर सभाएं की हैं। आज का ‘गौ-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ इस अभियान का निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, जहां से गौ-रक्षा को लेकर देशव्यापी रणनीति की घोषणा की जा सकती है।
