यूपी में भीषण गर्मी का प्रकोप, मार्च में ही ‘heatwave’ जैसे हालात, फसलों पर संकट
उत्तर प्रदेश में इस बार गर्मी ने समय से पहले ही अपना विकराल रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मार्च महीने में ही मई जैसी भीषण गर्मी का एहसास होने लगा है। ताजनगरी आगरा में अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस महीने के औसत तापमान (32-33 डिग्री) से काफी अधिक है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस बार हीटवेव (लू) के दिन जल्द आ सकते हैं और इनकी अवधि भी बढ़ सकती है।
इस अप्रत्याशित गर्मी का सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मार्च में ही तेज गर्मी से डिहाइड्रेशन और थकान बढ़ सकती है। तापमान बढ़ने पर हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। बुजुर्गों, बच्चों और खुले में काम करने वाले लोगों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ सकता है। यूवी इंडेक्स भी 6-7 तक पहुंच सकता है, जिससे त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
कृषि के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। इस समय गेहूं जैसी रबी की फसलों में दाने भरते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में अचानक वृद्धि से फसल जल्दी पक जाती है, जिससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते और उनका आकार छोटा रह जाता है। इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो सकता है और बाजार में गेहूं के दाम बढ़ सकते हैं।
गर्मी के जल्द शुरू होने से बिजली की खपत भी बढ़ गई है। एयर कंडीशनर, कूलर और पंखे जल्दी चलने लगे हैं, जिससे बिजली की मांग में वृद्धि हुई है। इसके साथ ही पानी की खपत भी बढ़ेगी, जिससे जल संकट की आशंका है। इन उपकरणों के लंबे समय तक चलने से लोगों की जेब पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
उत्तर भारत में आमतौर पर अप्रैल-मई में तेज गर्मी शुरू होती है, लेकिन मौजूदा तापमान के रुझान से हीटवेव का मौसम लंबा खिंच सकता है। जहां सामान्य तौर पर लू 5-6 दिन चलती है, वहीं इस बार यह 10-12 दिनों तक चल सकती है। ऐसे में लोगों को बाहर निकलने से पहले विशेष सावधानी बरतनी होगी।
