लाल किला आतंकी हमले के साजिशकर्ता की तलाश तेज, इंटरपोल से मांगी मदद (Red Fort attack)
राष्ट्रीय जांच एजेंसियों ने लाल किला आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता डॉ. मुजफ्फर राथर की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल से मदद मांगी है। बहुत जल्द राथर के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो सकता है। राथर पर 10 नवंबर को लाल किला आतंकी हमले के लिए अफगानिस्तान से फंडिंग जुटाने और हमले में शामिल लोगों को अन्य सहयोग उपलब्ध करवाने का आरोप है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, राथर ने आत्मघाती आतंकी डॉ. उमर-उन-नबी के लिए लॉजिस्टिक्स और फंडिंग की व्यवस्था की थी। सफेदपोश आतंकी नेटवर्क से जुड़े राथर ने आतंकवादी मॉड्यूल के लिए फंड जुटाने में सहायता की और लगभग छह लाख रुपये का योगदान दिया।
मूल रूप से दक्षिण कश्मीर का रहने वाला डॉ. मुजफ्फर राथर, सहारनपुर से पकड़े गए डॉ. अदील राथर का भाई है। उसे एनआईए की अदालत पहले ही फरार अपराधी घोषित कर चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि राथर भारत छोड़ने के बाद विदेश से पूरी साजिश को अंजाम दे रहा था और वर्तमान में अफगानिस्तान में छिपा हुआ है।
जांच एजेंसियों को एन्क्रिप्टेड संदेशों से पता चला है कि यह पूरा षड्यंत्र अफगानिस्तान के ठिकानों से चल रहा था। राथर ने आतंकवादियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और अफगानिस्तान में छिपे हैंडलरों से बम बनाने और हमले को अंजाम देने के तरीकों के बारे में मदद उपलब्ध करवाई।
राथर पिछले साल अगस्त माह में भारत छोड़कर दुबई गया था और दिल्ली विस्फोट से ठीक पहले वह अफगानिस्तान में जा छिपा। 2021 में राथर ने मुजम्मिल अहमद गनई और डॉ. उमर के साथ तुर्की की यात्रा की थी। इसी दौरान वह अपने हैंडलर के संपर्क में आए थे और अफगानिस्तान जाने का प्रयास किया था। अधिकारियों के अनुसार यह यात्रा इसी षड्यंत्र का ही एक हिस्सा मानी जाती है।
फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत राथर, उमर और गनई ने यात्रा के बाद विस्फोटक पदार्थ जुटाना शुरू कर दिया था। श्रीनगर पुलिस की जांच के बाद गनई की गिरफ्तारी और विस्फोटकों का जखीरा पकड़ा गया, जिसके बाद उमर ने घबराहट में लाल किले के बाहर ‘पूर्व-समय’ विस्फोट कर दिया।
