स्कूली वाहनों की नियमित जांच होगी, बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवहन विभाग का नया नियम
बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों की नियमित जांच के आदेश जारी किए हैं। इस संबंध में सभी विद्यालयों के प्रबंधकों को पत्र भेजकर विस्तृत निर्देश दिए गए हैं।
नए नियमों के अनुसार, 12 वर्ष या उससे कम आयु के बच्चों वाले वाहनों में एक परिचालक/परिचालिका का होना अनिवार्य होगा। यह व्यक्ति बच्चों को सुरक्षित रूप से वाहन में चढ़ने और उतरने में सहायता करेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसके अतिरिक्त, शिक्षण संस्थानों में उपयोग होने वाले वाहनों के चालकों का चरित्र सत्यापन और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा। स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज को प्रतिमाह वाहन के सुरक्षा मानकों, प्राथमिक चिकित्सा किट, फायर स्टिंगविशर और इमरजेंसी अलार्म जैसे उपकरणों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अनफिट पाए जाने वाले वाहनों को बच्चों के परिवहन के लिए इस्तेमाल करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस पहल का उद्देश्य स्कूली यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाना और अभिभावकों को मानसिक शांति प्रदान करना है।
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