दिल्ली की जहरीली हवा में ‘संजीवनी’! बंसेरा पार्क में बांस ने किया कमाल, प्रदूषण और गर्मी दोनों पर काबू
दिल्ली की जहरीली हवा के बीच सराय काले खां का बंसेरा पार्क प्रदूषण कंट्रोल का रास्ता दिखा रहा है। लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना के निर्देश पर दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) के लिए दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) द्वारा किए गए एक तुलनात्मक अध्ययन में यह साफ तौर पर सामने आया है कि बंसेरा, अपने बांस के जंगलों के साथ, हर पर्यावरणीय पैरामीटर पर बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
बांस की वजह से बंसेरा में एक अनोखा माइक्रोक्लाइमेट विकसित हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप अन्य हरे-भरे क्षेत्रों और गैर-हरे शहरी क्षेत्रों की तुलना में AQI और तापमान कम है। मिट्टी की गुणवत्ता में भी काफ़ी सुधार हुआ है। अध्ययन के अनुसार, बांस, जिसमें कार्बन की खपत और ऑक्सीजन उत्सर्जन की दर ज्यादा होती है, प्रदूषण कम करने का एक प्रभावी साधन हो सकता है।
यह अध्ययन 28-31 अक्टूबर और 19-22 नवंबर, 2025 के बीच आठ दिनों में किया गया था। इसमें पाया गया कि बंसेरा का AQI, ISBT सराय काले खां, ITO, मयूर विहार, पटपड़गंज और नेहरू नगर जैसे शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अमृत बायोडायवर्सिटी पार्क, कालिंदी कुंज और यहां तक कि लोधी गार्डन जैसे अलग-अलग तरह के पेड़ों वाले अन्य हरे-भरे क्षेत्रों की तुलना में काफी बेहतर था।
बंसेरा में तापमान अन्य हरे-भरे क्षेत्रों/पार्कों की तुलना में 9.7 प्रतिशत कम और शहरी क्षेत्रों की तुलना में 19.2 प्रतिशत कम था। बंसेरा में ज़मीन की सतह का तापमान सात प्रतिशत कम था, जो साफ तौर पर दर्शाता है कि यह क्षेत्र हीट आइलैंड प्रभाव को कम करने में भी मदद करता है। बंसेरा में मिट्टी की गुणवत्ता भी अन्य पार्कों और हरे-भरे क्षेत्रों की तुलना में काफी बेहतर थी।
