स्मॉग टावर बना सरकारी बोझ: लाखों खर्च, AQI नंबर-1
दिल्ली के आनंद विहार में प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्थापित स्मॉग टावर, जिसे विभिन्न एजेंसियों और विशेषज्ञों ने अप्रभावी घोषित कर दिया है, अब भी चालू है। विडंबना यह है कि इस टावर के संचालन पर हर महीने लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन आनंद विहार का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) दिल्ली के अन्य इलाकों की तुलना में लगातार सबसे अधिक बना हुआ है। यह स्थिति सरकारी धन के दुरुपयोग और अप्रभावी समाधानों पर सवाल खड़े करती है।
वर्ष 2021 में, उच्चतम न्यायालय के निर्देशानुसार, दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत दो स्थानों पर स्मॉग टावर लगाए गए थे। इनमें से एक टावर दिल्ली सरकार द्वारा बाबा खड़ग सिंह मार्ग (कनॉट प्लेस) पर स्थापित किया गया था, जबकि दूसरा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा आनंद विहार में लगाया गया था। प्रदूषण नियंत्रण में अपनी अप्रभावीता के कारण कनॉट प्लेस स्थित टावर को काफी पहले ही बंद कर दिया गया था। इसके विपरीत, आनंद विहार का टावर अभी भी संचालित हो रहा है, जो चिंता का विषय है।
एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जवाब में प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने स्वयं स्वीकार किया है कि आनंद विहार स्थित स्मॉग टावर अभी भी चालू है। सीपीसीबी के मुताबिक, यह टावर अपने 200 से 400 मीटर के दायरे में पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर को अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही कम करने में सक्षम है। इसके संचालन पर प्रति माह लगभग 10.57 लाख रुपये का खर्च आता है। यह आंकड़ा आईआईटी-बॉम्बे और आईआईटी-दिल्ली द्वारा किए गए मूल्यांकनों पर आधारित है। इससे पहले, अक्टूबर 2022 में, एक अन्य आरटीआई के जवाब में यह भी सामने आया था कि 20-100 मीटर की बहुत छोटी सीमा में, पीएम 2.5 का स्तर 8 से 39 प्रतिशत और पीएम 10 का स्तर 19-50 प्रतिशत तक कम हुआ था।
संचालन और रखरखाव की लागत का विस्तृत विवरण भी सामने आया है। वर्तमान में, टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड इस टावर का संचालन लगभग 10.27 लाख रुपये प्रति माह की लागत पर कर रहा है। इस राशि में बिजली शुल्क, जीएसटी और एनबीसीसी को देय आठ प्रतिशत परियोजना प्रबंधन परामर्श (पीएमसी) शुल्क शामिल नहीं है, जिससे कुल मासिक खर्च बढ़कर लगभग 11-12 लाख रुपये हो जाता है। परियोजना की कुल निर्माण लागत लगभग 21-22 करोड़ रुपये बताई गई है, जिसमें 18.52 करोड़ रुपये निर्माण व्यय, अतिरिक्त शुल्क और एनबीसीसी का पीएमसी शुल्क शामिल है।
जब इस मामले पर सीपीसीबी के एक सदस्य से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस मुद्दे पर अनभिज्ञता व्यक्त की और कहा कि इस पर बोर्ड की बैठक में चर्चा की जाएगी।
यह स्थिति पर्यावरणविदों की उन चिंताओं को पुष्ट करती है जो दिल्ली जैसे बड़े शहर में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए स्मॉग टावर और क्लाउड सीडिंग जैसे अस्थायी और महंगे समाधानों के बजाय दीर्घकालिक और स्थायी उपायों पर जोर देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण के मूल कारणों को संबोधित करना ही वायु गुणवत्ता में वास्तविक सुधार ला सकता है।
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