साहित्य अकादमी ने मनाई कथाकार अमरकांत की जन्मशती, ‘जनभाषा’ के जनक को किया याद | Hindi literature news
राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करते हुए, केंद्रीय हिंदी संस्थान और साहित्य अकादमी ने प्रसिद्ध कथाकार अमरकांत की जन्मशती पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया। अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य जगत की हस्तियों ने अमरकांत के अद्वितीय लेखन और उनके ‘जनभाषा’ के प्रति समर्पण को याद किया। यह आयोजन हिंदी साहित्य में उनके अमूल्य योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था।
अमरकांत: सामान्य जन के कथाकार
संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील बाबूराव कुलकर्णी के स्वागत वक्तव्य के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष माधव कौशिक ने अमरकांत को सामान्य जन का सच्चा आइकन बताया। उन्होंने कहा कि अमरकांत का लेखन संयम और सृजनात्मकता का अद्भुत संगम था, जिसने उन्हें हिंदी साहित्य में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। मुख्य वक्ता प्रो. नंदकिशोर पांडेय ने इस बात पर जोर दिया कि अमरकांत ने ही ‘जनभाषा’ को साहित्य में प्रतिष्ठित किया, जिससे आम लोगों की आवाज साहित्यिक फलक पर गूंज उठी।
स्मृतियों और संघर्षों का स्मरण
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित अमरकांत की सुपुत्री संध्या शिवशरण सिन्हा ने अपने पिता के भावुक पहलुओं को संस्मरणों और गीतों के माध्यम से साझा किया, जिससे सभागार में मौजूद सभी लोग भावुक हो उठे। साहित्य अकादमी की उपाध्यक्ष प्रो. कुमुद शर्मा ने अमरकांत के स्वाधीनता संग्राम के संघर्षों और उनके सपनों पर प्रकाश डाला, जो उनके लेखन में भी परिलक्षित होते हैं। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि जब समकालीन लेखक जटिल साहित्यिक बिंब गढ़ रहे थे, तब अमरकांत अपनी कहानियों में जनभाषा बुन रहे थे, जिससे उनका साहित्य अधिक सुलभ और प्रभावशाली बन सका।
डॉ. आशुतोष ने अमरकांत को समय और परिवेश का प्रेमी बताया, जो अपनी कहानियों को ‘क्लासिक सेंस’ के साथ लिखते थे। डॉ. अशोक कुमार ज्योति, उषारानी राव और योगेश पाटील जैसे विद्वानों ने उनके उपन्यासों पर गहन चर्चा की, उनके पात्रों और कथावस्तु की प्रासंगिकता को उजागर किया। इस संगोष्ठी में प्रो. चित्तरंजन मिश्र और हरिमोहन शर्मा सहित कई अन्य साहित्यकार भी उपस्थित रहे, जिन्होंने अमरकांत के साहित्यिक विरासत को समृद्ध करने में योगदान दिया।
