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सचिवों की कमी से जूझ रहीं सहकारी समितियां, किसान हो रहे परेशान

By Nov 22, 2025

सिद्धार्थनगर जिले में साधन सहकारी समितियों में सचिवों की कमी एक विकट समस्या का रूप ले चुकी है, जिसका सीधा असर किसानों की सुविधा पर पड़ रहा है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी जटिलताओं और नियमों के चलते नई नियुक्तियां अटकी पड़ी हैं, जिससे किसानों को आवश्यक खाद और बीज प्राप्त करने में घंटों भटकना पड़ रहा है।

नियमानुसार, किसी भी व्यक्ति को सचिव बनने के लिए पहले पांच साल तक विभाग में कर्मचारी के तौर पर काम करना अनिवार्य है। इसके बाद, समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सात सदस्यों सहित कुल नौ सदस्यों का अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होता है। यह प्रक्रिया इतनी लंबी और जटिल है कि कई समितियां वर्षों तक बिना सचिव के संचालित होती रहती हैं।

समस्या का एक और प्रमुख कारण वेतन की जगह कमीशन आधारित व्यवस्था है। सचिवों को आवश्यक वस्तुओं की बिक्री पर कमीशन मिलता है। उदाहरण के लिए, एक ट्रक यूरिया बेचने पर लगभग साढ़े चार हजार रुपये का कमीशन मिलता है। एक सीजन में अधिकतम 10-12 ट्रक यूरिया की बिक्री से सचिव की वार्षिक आय 45-50 हजार रुपये तक ही सीमित रह जाती है। इस आय में से उन्हें लेखा-परीक्षण, बैलेंस शीट तैयार कराने, यात्रा और अन्य खर्चे भी उठाने पड़ते हैं। गलती होने पर सचिव के साथ-साथ पूरा समिति सदस्य मंडल भी उत्तरदायी होता है, जिससे सदस्य हस्ताक्षर करने से कतराते हैं और सचिव नियुक्त करने से मुकर जाते हैं।

जिले में 124 समितियों में से 119 संचालित हैं, लेकिन 43 समितियों में सचिव तैनात नहीं हैं। जहां सचिव नहीं हैं, वहां पड़ोसी समिति के सचिव अस्थायी रूप से कार्यभार संभाल रहे हैं। इससे एक समिति पर उपस्थित रहने के कारण अन्य समितियां बंद रह जाती हैं। रबी सीजन होने के कारण किसानों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। खेत तैयार हैं, सिंचाई हो चुकी है, लेकिन खाद-बीज की उपलब्धता में सचिवों की कमी एक बड़ी बाधा साबित हो रही है। कई गांवों में तो बंद पड़ी समितियों के परिसर में लोग कपड़े सुखाने लगे हैं।

नियमानुसार, एक न्याय पंचायत पर एक समिति होनी चाहिए, लेकिन जिले में कई समितियां दो से तीन न्याय पंचायतों का बोझ ढो रही हैं। 76 सचिवों पर 119 समितियों का प्रभार है, और 30 से अधिक सचिव ऐसे हैं जिनके पास दो से तीन समितियों का अतिरिक्त कार्यभार है।

हाल ही में सहारनपुर जिले में हुई एक घटना ने सचिवों की नियुक्ति को लेकर विभाग में भय और बढ़ा दिया है। वहां कुछ सचिवों की नियुक्ति के बाद निरीक्षण में खामियां मिलने पर सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। इसके बावजूद, मुख्यमंत्री द्वारा एक सचिव एक समिति पर तैनात करने के निर्देश दिए जाने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, चंद्रजीत यादव ने स्वीकार किया है कि सचिव की तैनाती को लेकर कई जटिलताएं हैं और अभी कोई स्पष्ट आदेश नहीं आया है। विभाग किसानों को परेशानी से बचाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन नियमों और प्रक्रियाओं के कारण नई नियुक्तियां रुकी हुई हैं। स्थिति सुधारने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।

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