गाजियाबाद में प्रदूषण से राहत सिर्फ हवा के भरोसे, अधिकारी नहीं दिला पाए निजात
गाजियाबाद में वायु प्रदूषण की स्थिति हवा की गति पर निर्भर है। सीपीसीबी के अनुसार, हवा की गति बढ़ने से एक्यूआई में गिरावट आई है, लेकिन लोनी देश का सबसे प्रदूषित क्षेत्र बना हुआ है।
जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) हवा की गति के साथ घट-बढ़ रहा है। हवा की गति बढ़ने पर एक्यूआइ में गिरावट आती है, जबकि हवा की गति कम होने पर प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। बुधवार को हवा की गति बढ़ने से एक्यूआइ में 37 अंक की गिरावट आई और यह 324 दर्ज किया गया, जबकि मंगलवार को यह 361 था।
बुधवार को जिले में हवा की औसतन गति 11 किलोमीटर प्रतिघंटा रही, जिससे एक्यूआइ में गिरावट आई। जब हवा की गति चार से पांच किलोमीटर प्रतिघंटा रहती है, तो एक्यूआई 400 के करीब बना रहता है। अधिकारियों का कहना है कि हवा की गति बढ़ने पर धूल के कण उड़ जाते हैं, जबकि कम गति पर वे वायुमंडल में घूमते रहते हैं।
लोगों का अधिकारियों से भरोसा उठ गया है क्योंकि कोई भी ठोस योजना नहीं होने के कारण प्रदूषण से राहत मिलने का नाम नहीं ले रही है। लोगों का कहना है कि अगर हवा की गति और बढ़ जाएगी तो प्रदूषण कम हो जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि हवा की रफ्तार की ही तरह इस महीने में प्रदूषण के लिए हवा की दिशा भी एक कारक है। खास तौर पर उत्तर-पश्चिम की ओर चलने वाली हवा के कारण पंजाब-हरियाणा के खेतों से आनेवाला पराली का धुआं भी दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ाता है।
लोनी देश में सबसे प्रदूषित क्षेत्र दर्ज किया गया। मंगलवार को भी लोनी की स्थिति दूसरे नंबर पर थी। लोनी का एक्यूआइ बुधवार को 403 दर्ज किया गया। वहीं, संजय नगर की हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई।
लोग सबसे अधिक प्रदूषण को लेकर संशय में हैं क्योंकि सीपीसीबी के अनुसार एक्यूआई 361 और आइक्यू एयर के अनुसार 174 दर्ज किया गया। इसमें 150 का अंतर है। लोगों का कहना है कि किस एक्यूआइ को सही मानें ये समझ नहीं आ रहा है।
