विधान मंडलों की रैंकिंग: राष्ट्रीय विधायी सूचकांक (NLI) से सुधरेगा प्रदर्शन
देशभर की विधान सभाओं और विधान परिषदों के कामकाज को अधिक दक्ष, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय विधायी सूचकांक (National Legislative Index – NLI) तैयार करने हेतु एक कार्यकारी समिति का गठन किया जाएगा। इस सूचकांक के आधार पर विभिन्न विधान मंडलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन कर उनकी रैंकिंग निर्धारित की जाएगी। इस पहल पर 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में व्यापक सहमति बनी है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष की मांग पर कार्यकारी समिति गठित करने का आश्वासन दिया है। यह सूचकांक विधान मंडलों को जनता के प्रति अधिक उत्तरदायी बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित करने में सहायक होगा। इससे विधायी प्रक्रियाओं में सुधार आएगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं में नागरिकों का विश्वास मजबूत होगा।
राष्ट्रीय विधायी सूचकांक में सदन के संचालन, प्रश्नकाल, विधायी कार्य, बजट पारित करने की समयसीमा, समितियों की सक्रियता और सदस्यों की भागीदारी जैसे मानकों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य न केवल उपलब्धियों को उजागर करना है, बल्कि सुधार की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करना भी है। इससे सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और एकरूप मानक विकसित करने में मदद मिलेगी।
सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि सदन के नियमित और प्रभावी संचालन से ही सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित होती है। इस सूचकांक को मूर्त रूप देने के लिए एक कार्यकारी समिति के गठन की मांग को लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में किए गए नवाचारों की भी सराहना की, जो जीवंत लोकतंत्र का प्रतीक है।
