बिहार में राज्यसभा की जंग: नितिन नबीन का दिल्ली टिकट पक्का, कुशवाहा की विदाई तय; चिराग के सामने अग्निपरीक्षा
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटें अप्रैल 2026 में खाली हो रही हैं, जिसके चलते राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा से विधायक और पूर्व मंत्री नितिन नबीन के राज्यसभा जाने की प्रबल संभावना है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद उनके मंत्री पद से इस्तीफे को इसी दिशा में एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी की यह रणनीति रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पद संभालने वाले नेताओं को संसद में भेजा जाए, ताकि उन्हें भविष्य की बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जा सके।
वहीं, जदयू के दो वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है, जिन्हें पार्टी पहले भी दो-दो बार राज्यसभा भेज चुकी है। नीतीश कुमार के कार्यकाल को लेकर सामान्यतः दो बार से अधिक मौका नहीं देने की परंपरा रही है, लेकिन इन नेताओं के प्रभाव को देखते हुए पुन: मौका मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
दूसरी ओर, उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति कमजोर नजर आ रही है। उनकी पार्टी के पास मात्र 4 विधायक हैं, जो राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। लोकसभा चुनाव में हार और विधान परिषद के वादे के अधूरे रहने के बाद, उन्हें राज्यसभा से बाहर किया जा सकता है ताकि परिवारवाद के आरोपों से बचा जा सके।
चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (आर) के लिए पांचवीं सीट जीतना एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होगी। उनकी पार्टी के पास 19 विधायक हैं, जबकि एक सीट के लिए 41 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। चार सीटें जीतने के बाद एनडीए के पास 38 विधायक बचते हैं, जिससे चिराग की पार्टी को जीत के लिए 3 और विधायकों की आवश्यकता होगी। यह सीट क्रॉस वोटिंग या विपक्ष में सेंध लगाए बिना जीतना मुश्किल लग रहा है।
