पाकिस्तान में युद्ध के कारण गहराया प्रदूषण का संकट, स्मॉग का बढ़ा खतरा | international news
पाकिस्तान में ऊर्जा संकट और युद्ध के दुष्प्रभावों ने मिलकर एक बड़े पर्यावरणीय खतरे को जन्म दे दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एलएनजी की सप्लाई रुकने के कारण देश में बिजली उत्पादन के लिए कोयले और फर्नेस ऑयल का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जिससे हवा में जहरीले कणों की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच रही है।
गैस संकट और ईंधनों का बढ़ता विकल्प
कतर और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से गैस की आपूर्ति कम होने के बाद पाकिस्तान के घरेलू और औद्योगिक क्षेत्रों में गैस की किल्लत बढ़ गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए बिजलीघरों में कोयला और तेल जलाया जा रहा है, जिससे निकलने वाला धुआं पहले से ही प्रदूषित हवा को और अधिक जहरीला बना रहा है। लाहौर, रावलपिंडी और मुरी जैसे शहर इस बदतर होती हवा की मार झेल रहे हैं।
स्मॉग के अन्य प्रमुख कारण
सिर्फ ऊर्जा संकट ही नहीं, बल्कि वाहनों का धुआं, कारखानों और ईंट भट्टों से निकलने वाला कचरा, तथा सर्दियों से पहले खेतों में पराली जलाना जैसी समस्याएं मिलकर स्थिति को भयावह बना रही हैं। मौसम के मिजाज के कारण यह जहरीला धुआं वातावरण में लंबे समय तक टिका रहता है, जिससे नागरिकों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
सुधार के उपाय और भावी चुनौतियां
सरकार ने 2030 तक आधी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इसके लिए साफ ऊर्जा और बेहतर चार्जिंग ढांचे की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि निजी कंपनियों को गैस आयात की अनुमति देने और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने से ही इस संकट से पार पाया जा सकता है। ऊर्जा की जरूरतें पूरी करने के साथ वायु गुणवत्ता को बचाए रखना अब देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
