जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के विवाद पर सियासत तेज, तिहाड़ भेजे गए कार्यकर्ता | national news
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शन के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को तिहाड़ जेल भेजे जाने के बाद पार्टी नेतृत्व ने इस प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखना और विरोध जताना किसी भी नागरिक का मौलिक अधिकार है।
घटनाक्रम के मुताबिक, जंतर-मंतर को हाल ही में निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। इसके बावजूद पार्टी के नेता और कार्यकर्ता वहां पहुंचे थे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस प्रशासन का पक्ष है कि इन नेताओं ने पूर्व में भरे गए बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया है और भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 163 की अवहेलना की है, जिसके चलते उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
इस पूरे घटनाक्रम से राजधानी में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है और विपक्षी खेमों से भी इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जानकारों का मानना है कि इस तरह के प्रदर्शनों से प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक दलों के बीच टकराव आने वाले दिनों में और गहरा सकता है, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की बहस फिर से केंद्र में आ गई है।
