जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले सियासी घमासान, सीजेपी ने केंद्र सरकार पर लगाया आपातकाल जैसे हालात पैदा करने का आरोप | delhi politics
राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी उस وقت तेज हो गई जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन और पार्टी आमने-सामने आ गए। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और वोटर लिस्ट पुनरीक्षण में अनियमितताओं के विरोध में सीजेपी ने जंतर-मंतर पर जुटने का आह्वान किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके चलते राष्ट्रीय राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवा वर्ग यानी जेन-जी से खौफ खा रही है और आंदोलन को दबाने के लिए तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है। दिपके ने कहा कि यदि सरकार को युवाओं से इतना ही डर है, तो पूरे देश में ही तालाबंदी कर दी जानी चाहिए। उन्होंने ट्रेनों के रद्द होने और कार्यकर्ताओं की आवाजाही पर रोक लगाए जाने पर भी कड़ा एतराज जताया है।
पार्टी के अन्य पदाधिकारियों ने मौजूदा हालात की तुलना सीधे तौर पर आपातकाल से कर दी है। सीजेपी का दावा है कि विभिन्न राज्यों में उनके कार्यकर्ताओं को पुलिस द्वारा या तो हिरासत में लिया जा रहा है या फिर उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया गया है। लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी दल भी चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। इस प्रकार के प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव से आम जनजीवन पर भी असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
