पिनाका रॉकेट: भारत की मारक क्षमता में ‘गाइडेड’ इज़ाफ़ा, 120 किमी दूर सटीकता से वार
भारतीय सेना की युद्ध रणनीति में पिनाका गाइडेड रॉकेट प्रणाली के आगमन से एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है। अब सेना अंधाधुंध फायरिंग से आगे बढ़कर सटीक और गहरे लक्ष्यों पर प्रहार करने की क्षमता हासिल कर रही है। अमेरिका की एक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, यह नई स्वदेशी हथियार प्रणाली पारंपरिक तोपखाने को लंबी दूरी के प्रभावी प्रतिरोधक हथियार में बदल देती है। इससे सीमावर्ती इलाकों तक सीमित प्रभाव के बजाय दुश्मन के भीतर गहरे तक मार करना संभव हो सकेगा।
इस प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीकता है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने पिछले साल एलआरजीआर-120 का सफल परीक्षण किया था, जिसमें रॉकेट ने 120 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को बेहद सटीकता से भेदा। यह पूरी तरह से स्वदेशी हथियार प्रणाली है और इसे मौजूदा पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चरों (एमबीआरएल) से ही दागा जा सकता है, जिससे लागत में भी कमी आती है। एलआरजीआर-120 में इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस), बीच रास्ते में अपडेट और अंतिम चरण की गाइडेंस का इस्तेमाल किया गया है, जो इसकी उच्च सटीकता सुनिश्चित करता है। एक साथ आठ गाइडेड रॉकेट दागने की क्षमता से दुश्मन के कमांड सेंटर, तोपखाने और लॉजिस्टिक ठिकानों पर प्रभावी हमले किए जा सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस भारतीय प्रणाली की ओर ध्यान आकर्षित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस ने पिनाका सिस्टम में रुचि दिखाई है, जो अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में इसकी बढ़ती मांग का संकेत देता है। यद्यपि अमेरिका के एचआईएमएआरएस की रेंज अधिक है, लेकिन पिनाका भारत को लंबी दूरी के हमलों में बड़ी मजबूती प्रदान करता है और देश के स्वदेशी रक्षा उत्पादन को भी बढ़ावा देता है।
भविष्य में पिनाका की क्षमताओं को और बढ़ाया जाएगा। भविष्य में इसकी रेंज को 200 से 300 किलोमीटर तक ले जाने की योजना पर भी चर्चा चल रही है। यह विकास चीन और पाकिस्तान से मिलने वाली चुनौतियों के बीच भारत की सैन्य तैयारियों को और मजबूत करेगा।
