दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव की विकराल समस्या से जूझने वाले चार प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों—किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राजधानी प्रशासन ने इन...
दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव की विकराल समस्या से जूझने वाले चार प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों—किराड़ी, मुंडका, बवाना और नांगलोई जाट के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राजधानी प्रशासन ने इन इलाकों में पानी की निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के वास्ते एक महत्वाकांक्षी ड्रेनेज प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत रेलवे लाइन के किनारे लगभग 4.5 किलोमीटर लंबी एक नई ट्रंक ड्रेन का निर्माण किया जाएगा, जिस पर कुल 263.45 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
परियोजना की रूपरेखा और डिजाइन क्षमता
इस प्रस्तावित ट्रंक ड्रेन की डिजाइन क्षमता 760 क्यूसेक तय की गई है। अत्यधिक बारिश के दौरान जब स्थानीय नालों पर पानी का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है, तब यह नया चैनल अतिरिक्त पानी को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाएगा। मुंडका हाल्ट रेलवे स्टेशन के पास से शुरू होकर यह ड्रेन रेलवे लाइन के समानांतर आगे बढ़ते हुए सप्लीमेंटरी ड्रेन में जाकर मिलेगी। इसकी भौगोलिक बनावट और गहराई को स्थानीय जरूरतों व उपलब्ध भूमि के अनुसार तैयार किया जा रहा है।
किराड़ी क्षेत्र में जल निकासी का संकट
विशेष तौर पर किराड़ी इलाके में बारिश के दिनों में जल निकासी का भारी संकट उत्पन्न हो जाता है। क्षेत्र में वर्षा जल का अनुमानित प्रवाह करीब 1193 क्यूसेक है, जबकि यहाँ की मौजूदा केएसएन ड्रेन की क्षमता मात्र 88 क्यूसेक ही है। दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा बनाए जा रहे अन्य ड्रेनों के बावजूद लगभग 760 क्यूसेक पानी की निकासी का अंतर बना रहता है। इसी भारी भरकम अंतर को पाटने के लिए इस नई परियोजना को तैयार किया गया है, जो इस समस्या का स्थायी समाधान साबित होगी।
इन इलाकों के लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
इस नई ट्रंक ड्रेन के बनने से किराड़ी क्षेत्र की लगभग 70 अनधिकृत कॉलोनियों के लिए एक मजबूत आउटफॉल तैयार हो जाएगा। इसके अलावा रानिखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया, वीणा एन्क्लेव, रतन पार्क, राजधानी पार्क, रोहिणी सेक्टर-20 से 22, नांगलोई जेजे क्लस्टर, अध्यापक नगर और शिव राम पार्क जैसे घनी आबादी वाले इलाकों को भी जलभराव के झंझट से मुक्ति मिलेगी। इन क्षेत्रों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से स्थानीय नागरिकों को आवागमन और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, जिससे अब उन्हें बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
लागत और आगामी लक्ष्य
शुरुआती चरण में इस परियोजना का अनुमानित बजट 220.93 करोड़ रुपये था, जिसे बाद में संशोधित करके 263.45 करोड़ रुपये कर दिया गया। इस बढ़ी हुई राशि में सिविल निर्माण कार्य, पर्यावरण संरक्षण के उपाय, रखरखाव और रेलवे संपत्ति की शिफ्टिंग जैसे सभी आवश्यक खर्च शामिल हैं। इस पूरी परियोजना को अगले साल दिसंबर तक मुकम्मल करने का लक्ष्य तय किया गया है, ताकि समय रहते जनता को इस पुरानी समस्या से निजात दिलाई जा सके।