फॉर्म-6 में बदलाव के दावों पर चुनाव आयोग ने दी सफाई, राहुल गांधी के आरोपों को बताया भ्रामक | india politics
मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान फॉर्म-6 में कथित बदलावों को लेकर निर्वाचन आयोग और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म के मूल स्वरूप में एक भी कॉमा या फुल स्टॉप तक नहीं बदला गया है।
विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों के बाद आयोग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि बिहार में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान केवल एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। इस प्रोटोकॉल को पहले ही सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिल चुकी है। निर्वाचन संस्था का कहना है कि इस संबंध में फैलाए जा रहे दावे तथ्यात्मक रूप से गलत और जनता को भ्रमित करने वाले हैं।
शीर्ष अदालत में हुई सुनवाई के बाद उपजे विवाद के बीच राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां विपक्षी नेता इस मामले में प्रशासनिक पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों के हनन का आरोप लगा रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के दायरे में और कानूनी रूप से वैध है।
इस पूरे घटनाक्रम से चुनावी सुधारों और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है। भविष्य में मतदाता पंजीकरण की प्रकिया को लेकर आयोग के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, ताकि चुनावी शुचिता और पारदर्शिता पर आम जनता का भरोसा बरकरार रहे।
