मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पुराने मामलों में चल सकती है कानूनी कार्रवाई | national news
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC के पद को देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बेहद संवेदनशील माना जाता है। चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का दायित्व सौंपा गया है, जिसकी रक्षा के लिए CEC को विशेष कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है। कानून के मुताबिक, कोई भी अदालत CEC या चुनाव आयुक्त के खिलाफ उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए सिविल या आपराधिक मुकदमा नहीं चला सकती है। यह सुरक्षा उन्हें पद पर रहते हुए और रिटायरमेंट के बाद आजीवन मिलती है।
हालाँकि, यह कानूनी कवच हर अपराध या मामले में पूर्ण इम्युनिटी नहीं देता है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 16 और संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मिलने वाली यह सुरक्षा केवल उन कार्यों पर लागू होती है जो व्यक्ति ने CEC के रूप में अपनी आधिकारिक ड्यूटी निभाते समय किए हों। इसका मतलब यह है कि यदि आरोप उस समय के हैं जब व्यक्ति CEC नहीं था, बल्कि किसी अन्य प्रशासनिक पद पर कार्यरत था, तो बाद में CEC बनने से पुराने मामलों पर स्वतः कानूनी इम्युनिटी नहीं मिल जाती है।
हाल ही में केरल सरकार द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2006 के एक मामले में विजिलेंस जांच के आदेश दिए जाने के बाद यह बहस तेज हो गई है। जानकारों का कहना है कि पूर्व कार्यकाल के भ्रष्टाचार या अन्य मामलों में जांच एजेंसियां नियमों के तहत आगे बढ़ सकती हैं। हालांकि, इन मामलों में समय-सीमा, कानूनी प्रक्रिया और अदालती समीक्षा की महत्ता बनी रहती है, और अंतिम निर्णय न्यायपालिका की व्याख्या पर निर्भर करता है।
