चुनाव आयोग ने SIR के फैसलों पर असहमति की खबरों का किया खंडन, दी सफाई | national politics news
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्तों के बीच फैसलों को लेकर असहमति की चल रही चर्चाओं पर चुनाव आयोग ने औपचारिक रूप से विराम लगा दिया है। आयोग ने एक प्रेस रिलीज जारी कर यह स्पष्ट किया है कि पश्चिम बंगाल, बिहार और अन्य राज्यों में एसआईआर (SIR) से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय पूरी तरह से आपसी सहमति और सर्वसम्मति से लिए गए थे [national politics news]। हाल ही में एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद उभरे हैं, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे हमले किए थे।
आयोग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया की शुरुआत सबसे पहले 24 जून 2025 को बिहार से की गई थी, जिसके बाद इसे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी गत वर्ष इस पूरी प्रक्रिया को उचित ठहराया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्य निर्धारित नियमों के तहत ही आगे बढ़ रहा है। इस स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
चुनाव आयोग के इस कदम के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने विपक्ष पर आधारहीन आरोप लगाने और चुनावी संस्थाओं की साख को ठेस पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी ओर, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा को भी बढ़ा दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को इसका लाभ मिल सके। इस पूरे घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है [national politics news]।
