मतदाता सूची पुनरीक्षण पर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की खबरों पर सफाई | india politics news
मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग के भीतर कथित आंतरिक मतभेद की सामने आई रिपोर्टों के बाद आयोग के स्तर पर स्थिति स्पष्ट की गई है। आयोग की तरफ से यह बताया गया है कि किसी भी नीतिगत मुद्दे पर विचार-विमर्श के दौरान चुनाव आयुक्तों द्वारा सवाल पूछना या अपनी टिप्पणी देना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इस तरह की टिप्पणियों को किसी भी स्थिति में औपचारिक असहमति या डिसेंट के रूप में दर्ज नहीं किया जा सकता है। [india politics news]
सामने आई रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि एसआईआर से जुड़े फैसलों पर कुछ आयुक्तों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिस पर विपक्षी दलों ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विपक्षी नेताओं ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कार्यप्रणाली की जांच की मांग की है। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम आदेशों पर सभी संबंधित सदस्यों की सहमति और हस्ताक्षर मौजूद रहे हैं, जिससे संस्था की निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमानुसार कामकाज सुनिश्चित होता है।
