कानपुर देहात में kanpur news: आवारा कुत्तों का आतंक, हर महीने घायल हो रहे तीन हजार लोग
उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या आम जनजीवन के लिए गंभीर खतरा बन गई है। जिले की 614 ग्राम पंचायतों और 13 नगरीय क्षेत्रों में लगभग 12 हजार आवारा और पालतू कुत्ते घूम रहे हैं। इनके हमलों से हर दिन औसतन सौ लोग घायल होते हैं, जिन्हें इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। kanpur news के इस गंभीर मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन की सुस्ती के चलते स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और हाइड्रोफोबिया का खतरा
आवारा कुत्तों के काटने से पीड़ितों में जानलेवा हाइड्रोफोबिया जैसी गंभीर बीमारी का खतरा पैदा हो जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, कुत्ते के काटने के 24 घंटे के भीतर एंटी रैबीज वैक्सीन (ARB) लगना अनिवार्य है। हालांकि, ब्लॉक स्तर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर वैक्सीन की उपलब्धता के बावजूद कई बार मरीजों को स्टॉक न होने का हवाला देकर टरका दिया जाता है। जिला अस्पताल में हर कार्यदिवस पर 50 से 60 लोग एंटी रैबीज लगवाने पहुंच रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर भी भारी दबाव है।
प्रशासनिक लाचारी और नियमों की अनदेखी
सर्वोच्च न्यायालय ने स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंडों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से आवारा कुत्तों को हटाने तथा उनके लिए शेल्टर हाउस बनाने के साथ-साथ बर्थ कंट्रोल का स्पष्ट निर्देश दिया था। इसके तहत कुत्तों का बड़े पैमाने पर बंध्याकरण होना था, लेकिन धरातल पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। नगरीय क्षेत्रों में आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए आवश्यक संसाधन तक उपलब्ध नहीं हैं। संसाधनों की कमी का रोना रोकर जिम्मेदार विभाग अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
