जेपी सेंटर में अखिलेश-डिंपल सहित 8 को आजीवन मुफ्त सुविधाएं, सरकारी नियमों का उल्लंघन
लखनऊ के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएनआईसी) में सरकारी नियमों के उल्लंघन का एक बड़ा मामला सामने आया है। प्राधिकरण के दस्तावेजों के अनुसार, परियोजना के संचालन के लिए गठित निजी संचालन समिति में कुछ गैर-सरकारी व्यक्तियों को आजीवन और संस्थापक सदस्य बनाया गया था। इन सदस्यों को परिसर में उपलब्ध विभिन्न सुविधाओं, जैसे रेस्टोरेंट, जिम और होटल का निःशुल्क आजीवन उपयोग करने का अधिकार दिया गया था। यह व्यवस्था सामान्य सरकारी परियोजनाओं के संचालन के प्रचलित नियमों से अलग थी।
आजीवन सदस्यों में शामिल थे प्रमुख हस्तियां
इस व्यवस्था के तहत पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सांसद डिंपल यादव, पूर्व मुख्यमंत्री के निजी सचिव गजेंद्र सिंह, सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी, सांसद धर्मेंद्र यादव, अंजू नारायण, वसीफ़ हसन और अनुपमा प्रकाश को आजीवन निःशुल्क सदस्य बनाया गया था। यह निर्णय सरकारी नियमों के अनुसार नहीं लिया गया था, जिससे वित्तीय अनियमितताओं की आशंका बढ़ी है।
लागत में भारी वृद्धि और वित्तीय अनियमितताएं
परियोजना की प्रारंभिक लागत 265 करोड़ रुपये थी, जो तीन बार संशोधित होकर 2016 में 864 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह वृद्धि तीन वर्षों के भीतर तीन गुने से अधिक थी, जिसका मुख्य कारण ‘नान शेड्यूल्ड आइटम’ का प्रयोग था। इन आइटम्स का मार्केट रेट लगाया गया, जिससे लागत बढ़ी। उदाहरण के लिए, एसी लगाने की लागत दर 32 करोड़ रुपये अनुमोदित की गई थी, लेकिन टेंडर 42 करोड़ रुपये का निकाला गया, जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता है।
आर्किटेक्चर में बदलाव और नियमों का उल्लंघन
निर्माण कार्य के दौरान बिना अनुमोदन के उच्च विशिष्टियों वाले आइटम्स का प्रयोग किया गया। तत्कालीन अभियंताओं व अधिकारियों को दोषी मानते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई। इसके अलावा, बिना सक्षम स्तर के अनुमोदन के भवन के आर्किटेक्चर में भी बड़े बदलाव किए गए, जैसे छत पर स्विमिंग पूल, चौथे तल पर जिम और वीआईपी रूम, तथा छठे तल पर कैफेटेरिया का निर्माण। इन कार्यों से न केवल लागत बढ़ी, बल्कि वित्तीय नियमों का भी उल्लंघन हुआ।
निजी सोसाइटी को अनियमित हस्तांतरण
परियोजना को अनियमित रूप से एक निजी सोसाइटी को संचालन के लिए हस्तांतरित कर दिया गया। सामान्यतः, सरकारी परियोजनाओं का संचालन किसी शासकीय अभिकरण द्वारा किया जाता है और संचालन हेतु निजी संचालक का चयन टेंडर के माध्यम से होता है। यहां एक निजी संचालन समिति का गठन किया गया जिसमें गैर-सरकारी सदस्यों को आजीवन और संस्थापक सदस्य बनाया गया।
भविष्य की आवश्यकताएं
सर्वे के अनुसार, परियोजना को पूरा करने के लिए अभी भी लगभग 200 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। पूर्ण होने के बाद संचालन में भी अत्यधिक व्यय आएगा, जिससे परियोजना की वित्तीय व्यवहार्यता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
