अमेरिकी कारोबारी की नई शर्त: 15% टैरिफ का पूरा भुगतान, वरना नहीं खरीदेंगे माल
उत्तर प्रदेश के निर्यात कारोबार के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है, क्योंकि अमेरिकी कारोबारी अब 15 फीसदी टैरिफ का पूरा 100 प्रतिशत भुगतान भारतीय निर्यातकों से मांग रहे हैं। पहले इस पर आधा-आधा भुगतान की सहमति बनी थी, लेकिन अब अमेरिकी अपने रुख से पीछे हटते नजर आ रहे हैं।
निर्यातकों के अनुसार, अमेरिकी कारोबारी स्पष्ट शर्त रख रहे हैं कि जब तक पूरा टैरिफ नहीं दिया जाएगा, तब तक वे माल की खरीद नहीं करेंगे। साथ ही, यह दबाव भी बनाया जा रहा है कि यदि शर्तें नहीं मानी गईं तो वे यूरोप, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से माल मंगाएंगे।
लेदर, गारमेंट, हैंडीक्राफ्ट, इंजीनियरिंग और केमिकल जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। कानपुर, आगरा, नोएडा, वाराणसी और मुरादाबाद जैसे प्रमुख निर्यात केंद्रों के कारोबारी इस नई मांग को एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश से हर साल लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का कारोबार अमेरिका से होता है, जो इस नई शर्त के चलते प्रभावित होने की आशंका में है। लेदर निर्यातक प्रेरणा वर्मा का कहना है कि अमेरिकी कारोबारी मौजूदा स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे छोटे और मध्यम स्तर के निर्यातकों के लिए मुश्किलें बढ़ेंगी।
भारतीय निर्यात परिषद के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव के अनुसार, यदि टैरिफ का पूरा भार भारतीय पक्ष पर डाला गया तो इससे कारोबार की लागत बढ़ेगी और प्रतिस्पर्धा पर सीधा असर पड़ेगा। इससे कारोबार की कमर टूट सकती है। फिलहाल, कारोबारी आगे की रणनीति को लेकर चिंतित हैं।
