इंदिरापुरम में अतिक्रमण का जाल: राहगीर परेशान, जिम्मेदार बेखबर
गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र में अतिक्रमण ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों, फुटपाथों और यहां तक कि ग्रीन बेल्ट पर भी अवैध कब्जे हो रहे हैं, जिससे राहगीरों को चलने-फिरने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक साल से यह समस्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
इंदिरापुरम के न्याय खंड 2 जैसे इलाकों में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। विभिन्न प्रकार की अस्थायी और स्थायी दुकानें सड़क किनारे कब्जा करके संचालित की जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की जानकारी में कई अवैध मोटर वर्कशॉप और कबाड़ की दुकानें चल रही हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई के बजाय, कथित तौर पर उगाही का खेल जारी है। स्थानीय निवासियों ने इस संबंध में कई बार जीडीए (गाजियाबाद विकास प्राधिकरण) में शिकायतें दर्ज कराई हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
अतिक्रमण के कारण रोजाना भीषण जाम की समस्या उत्पन्न होती है, जिससे लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। विशेषकर नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम जैसे शहरों में नौकरी के लिए आने-जाने वाले लोगों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है। समय पर दफ्तर पहुंचना एक अनिश्चितता का विषय बन गया है।
इस अवैध गतिविधियों के कारण क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की सक्रियता भी बढ़ गई है, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को असुरक्षित महसूस होता है। 24 घंटे सुरक्षा की चिंता बनी रहती है।
स्थानीय निवासी रितिका गौड़ ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “सड़कों व ग्रीन बेल्ट पर कब्जा कर रखा है। अधिकारियों ने राहत दिलाने के बजाय आंखें मूंद रखी हैं। कोई भी सुनवाई के लिए तैयार नहीं है।” उनका आरोप है कि यह अतिक्रमण स्वतः नहीं हो रहा, बल्कि इसके पीछे सरकारी तंत्र की मिलीभगत और उगाही का खेल है। जब भी कभी इक्का-दुक्का बार अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई है, तो उसमें भी उगाही के आरोप सामने आए हैं। स्वर्ण जयंती पार्क के पास हाल ही में हुई अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के दौरान भी ऐसे मामले प्रकाश में आए थे।
जनता की मांग है कि प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले और सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराकर आम नागरिकों को राहत प्रदान करे।
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