ऑनलाइन युग में ऑफलाइन हाजिरी: दरभंगा विश्वविद्यालयों में कब होगा बदलाव?
जहां आज देश डिजिटल क्रांति के पथ पर अग्रसर है और हर काम ऑनलाइन हो रहा है, वहीं दरभंगा के ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय सहित इससे जुड़े कॉलेजों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने का तरीका अब भी पुराना ही है। मोबाइल ऐप के माध्यम से लाइव सेल्फी अपलोड कर हाजिरी बनाने की छह माह पूर्व शुरू हुई पहल अब तक इन शिक्षण संस्थानों में धरातल पर नहीं उतर सकी है।
शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों की तर्ज पर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी इस व्यवस्था को लागू करने की योजना बनाई थी। इसके तहत शिक्षकों और कर्मचारियों को अपने कार्यस्थल से पांच सौ मीटर की परिधि में रहकर मोबाइल ऐप पर अपनी लाइव सेल्फी अपलोड करनी होती। पटना विश्वविद्यालय में इस प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू भी किया गया था। इसी तर्ज पर बिहार के अन्य विश्वविद्यालयों में भी इसे विस्तार देने की योजना थी, जिसमें दरभंगा के दोनों विश्वविद्यालय भी शामिल थे।
वर्तमान में, इन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में बायोमीट्रिक मशीनों से हाजिरी बनाने की परंपरा जारी है। हालांकि, इन बायोमीट्रिक मशीनों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। सूत्रों के अनुसार, कोरोना काल से ही कई विभागों और कॉलेजों में बायोमीट्रिक मशीनें खराब पड़ी हैं। इसके कारण, कई शिक्षक और कर्मचारी विभाग व कार्यालयों में अपनी सुविधानुसार आते-जाते हैं, जिससे शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पाती। कई जगहों से अब भी मैन्युअल हाजिरी ही भेजी जा रही है, जबकि विभाग ने बायोमीट्रिक मशीन से ही हाजिरी भेजने का निर्देश जारी किया है। जिन संस्थानों में मशीनें खराब हैं या उपलब्ध नहीं हैं, उन्हें तत्काल ठीक कराने या नई मशीनें लगवाने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन कुछ संस्थान इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सिर्फ शिक्षक-कर्मचारी ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों में नामांकित छात्र-छात्राओं की उपस्थिति को भी ऑनलाइन करने की योजना थी, जिसके लिए टैब की व्यवस्था करने की बात कही गई थी। लेकिन, यह योजना भी अब तक अधर में लटकी हुई है। शिक्षकों के लिए प्रत्येक कार्य दिवस में कम से कम पांच घंटे और साप्ताहिक न्यूनतम 40 घंटे की उपस्थिति अनिवार्य है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में इसका पालन सुनिश्चित करना मुश्किल हो रहा है।
जानबूझकर मशीनें खराब करने और उन्हें ठीक न कराने जैसे मामले भी सामने आ रहे हैं। यह स्थिति पारदर्शिता और दक्षता में बाधा उत्पन्न कर रही है। जब सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है, तो हाजिरी जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया ऑफलाइन या अविश्वसनीय बायोमीट्रिक सिस्टम पर क्यों अटकी है, यह एक बड़ा सवाल है। उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने से शिक्षण संस्थानों में उपस्थिति को लेकर चल रही मनमानी पर अंकुश लगेगा और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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