अनिल अंबानी के खिलाफ ईडी की बड़ी कार्रवाई, 1452 करोड़ की संपत्ति जब्त
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने 1452 करोड़ रुपये की नई संपत्तियों को जब्त किया है। यह कदम ईडी द्वारा इस मामले में पहले की गई 7500 करोड़ रुपये की संपत्ति की जब्ती के बाद उठाया गया है। इस प्रकार, अब तक कुल मिलाकर लगभग नौ हजार करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की जा चुकी है, जो इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
सूत्रों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित इन संपत्तियों को जब्त करने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत अंतरिम आदेश जारी किए गए हैं। ये संपत्तियां मुख्य रूप से नवी मुंबई, चेन्नई, पुणे और भुवनेश्वर जैसे शहरों में स्थित बताई जा रही हैं। ईडी पहले भी इस मामले में अनिल अंबानी से पूछताछ कर चुकी है और उन्हें विदेशी मुद्रा उल्लंघन के एक मामले में फिर से तलब किए जाने की संभावना है।
इसी महीने की शुरुआत में, ईडी ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकाम), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े बैंक धोखाधड़ी मामलों की जांच के तहत नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नालेज सिटी में 132 एकड़ से अधिक जमीन जब्त की थी, जिसकी कीमत 4462 करोड़ रुपये आंकी गई थी।
ईडी की यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 406 और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी पर आधारित है। इस प्राथमिकी में आरकाम, अनिल अंबानी और अन्य का नाम शामिल है।
ईडी के अनुसार, आरकाम और समूह की अन्य कंपनियों ने वर्ष 2010 से 2012 के बीच घरेलू और विदेशी दोनों तरह के ऋणदाताओं से कुल 40,185 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। इसके बाद से नौ बैंकों ने समूह के ऋण खातों को धोखाधड़ी वाला घोषित कर दिया है। प्रारंभिक जांच से यह भी पता चला है कि एक कंपनी द्वारा लिए गए कर्ज का इस्तेमाल समूह की अन्य कंपनियों का ऋण चुकाने, संबंधित पक्षों को हस्तांतरित करने या म्यूचुअल फंड में निवेश करने के लिए किया गया, जो कि ऋण की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन था। ईडी इस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।
