नगर निगम की कमजोर पैरवी, ठेकेदार को मिला 5.48 करोड़ का लाभ: city news
शहर के नगर निगम को एक ठेकेदार कंपनी को 5.48 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश मिला है, जो निगम की अदालती पैरवी में गंभीर खामियों का नतीजा है। रविवार को सदन की बैठक में इस मुद्दे ने तूल पकड़ा, जहाँ पार्षदों ने इसे सरासर लापरवाही और अंदरूनी मिलीभगत का मामला बताया।
अदालत के आदेश पर नगर निगम के खाते से यह बड़ी रकम ठेकेदार कंपनी ‘लायंस सर्विसेज’ को जारी की गई, क्योंकि वाणिज्यिक अदालत में निगम अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने में विफल रहा। सूत्रों के अनुसार, ऊपरी अदालतों में भी ठोस पैरवी न होने के कारण निगम को यह भारी नुकसान उठाना पड़ा।
यह भुगतान उस राशि के एवज में किया गया है जिसे तत्कालीन नगर आयुक्त ने कंपनी द्वारा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने पर रोका था। ठेकेदार के अदालत जाने पर, निगम की ढीली कानूनी रणनीति का फायदा उसे मिला। यदि उच्च न्यायालय में भी प्रभावी पैरवी की जाती तो निगम की यह धनराशि बच सकती थी, लेकिन कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत के कारण ऐसा नहीं हुआ।
सदन की बैठक के बाद, कई पार्षदों ने नगर निगम के कुछ अधिकारियों और वकीलों पर जानबूझकर कमजोर पैरवी करने का आरोप लगाया, जिससे कंपनी को अनुचित लाभ हुआ। इस घटना ने निगम की कार्यशैली और कानूनी रणनीति पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पता चला कि संबंधित फाइलें अधिकारियों के पास उपलब्ध नहीं हैं। पर्यावरण अभियंता ने कहा कि फाइल उनके पास कभी आई ही नहीं, जबकि नगर आयुक्त ने इसे अपने कार्यकाल से पूर्व का मामला बताया। मुख्य वित्त एवं लेखा अधिकारी ने भी अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि खाता सीज होने पर प्रस्ताव रखा, लेकिन उन्हें जानकारी नहीं है। अपर नगर आयुक्त ने दावा किया कि उनके स्थानांतरण के बाद भुगतान हुआ और मामले में बड़े वकील से पैरवी की जा रही है, साथ ही उच्च न्यायालय से आदेश आने पर रिकवरी की बात कही।
