मुख्यमंत्री विशेष पंचायत पुरस्कार से वंचित रहीं आगरा की अधिकांश पंचायतें, महज पांच ने पूरी की योग्यता | agra news
आगरा जिले में गांवों को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की सरकारी कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। ‘मुख्यमंत्री विशेष पंचायत पुरस्कार’ योजना के तहत जिले की स्थिति बेहद निराशाजनक रही है। कुल 690 ग्राम पंचायतों में से केवल पांच ही इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की दौड़ में शामिल हो पाई हैं, जिससे 685 पंचायतें 50 लाख रुपये तक की इनामी राशि से दूर हो गई हैं।
मानकों पर क्यों पिछड़ गईं पंचायतें
इस योजना के तहत गांवों को स्वच्छता, प्लास्टिक मुक्त वातावरण, घर-घर कूड़ा उठान, कॉमन सर्विस सेंटर और स्थानीय स्तर पर आय सृजन जैसे 10 कड़े मानकों को पूरा करना था। योजना का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को सरकारी अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय खुद के संसाधनों से मजबूत बनाना था। हालांकि, जागरूकता की कमी और प्रशासनिक तैयारियों के अभाव में अधिकांश पंचायतों ने आवेदन तक नहीं किया। जिला स्तर पर मिले 10 आवेदनों में से भी पांच जांच के दौरान मानकों पर खरे नहीं उतरे और खारिज कर दिए गए।
शासन स्तर पर होगा अंतिम निर्णय
जिला पंचायत राज अधिकारी मनीष कुमार ने बताया कि पात्र पाई गईं पांच पंचायतों के प्रस्तावों को अंतिम मुहर के लिए शासन के पास भेज दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया से गांवों में बुनियादी सुविधाओं और डिजिटल सेवाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार ग्रामीण क्षेत्रों के पिछड़ने का बड़ा कारण बन रही है। यदि समय रहते पंचायतों को इन मानकों के प्रति जागरूक नहीं किया गया, तो भविष्य में भी विकास योजनाओं का पूरा लाभ गांवों तक नहीं पहुंच सकेगा।
