सहारनपुर में दूषित जल से 4000 से अधिक मौतें, 5 लाख लोग प्रभावित: UP Health Crisis
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक गंभीर UP Health Crisis सामने आया है, जहाँ 250 से अधिक गांवों के लगभग पांच लाख लोग दूषित पेयजल पीने को मजबूर हैं। चौंकाने वाली रिपोर्टों के अनुसार, इन क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के कारण 4000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और जीवन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल रही है, जिससे एक बड़े मानवीय संकट का खतरा मंडरा रहा है।
दूषित जल का भयावह सच
सहारनपुर जिले की पांच तहसीलों और 11 ब्लॉकों में बसे कई गांव वर्षों से दूषित जल की चपेट में हैं। महानगर के बीच से बहने वाली पांवधोई और ढमोला नदियों के साथ-साथ हिंडन और कृष्णा नदियों के किनारे बसे अधिकांश गांव सबसे अधिक प्रभावित हैं। ये नदियाँ अत्यधिक प्रदूषित हो चुकी हैं, जिसके कारण इन गांवों का भूजल पीने योग्य नहीं रह गया है। दूषित भूजल से डायरिया, हैजा, टाइफाइड, हेपेटाइटिस, त्वचा रोग, पीलिया और कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां तेजी से फैल रही हैं। 2024-2025 की रिपोर्टों में भी इन क्षेत्रों में त्वचा रोग, लीवर और कैंसर के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रदूषण के मुख्य कारण
भूजल प्रदूषण का मुख्य कारण नदियों में औद्योगिक और घरेलू कचरे का सीधा बहाव है। शुगर मिल्स, डिस्टिलरी, पेपर मिल्स, स्लाटरहाउस, डाइंग यूनिट्स, टेक्सटाइल और केमिकल फैक्टरियों से अनुपचारित रासायनिक अपशिष्ट सीधे नदियों में डाला जाता है। इसमें क्रोमियम, लेड, कैडमियम, डाई और अन्य विषाक्त रसायन जैसी भारी धातुएं शामिल होती हैं, जो पानी को जहरीला बना देती हैं। इसके अतिरिक्त, शहरों और गांवों से निकलने वाला सीवेज बिना किसी ट्रीटमेंट के नालों के माध्यम से नदियों में गिरता है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की कमी के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाता है, जिससे जलीय जीवन भी प्रभावित होता है। खेतों से बहने वाले उर्वरक, कीटनाशक और अन्य रसायन भी बारिश के पानी के साथ नदियों में मिलकर भूजल को दूषित करते हैं।
सरकारी प्रयासों की खानापूर्ति
केंद्र और राज्य सरकारें लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए ‘हर घर नल’ जैसी अनेक कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। हालांकि, इन योजनाओं के क्रियान्वयन में हीलाहवाली के चलते लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। जनप्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में भी इस मसले को उठाया गया है और हाल ही में देहात विधायक ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद सैंपल लेने के लिए टीमें गठित की गईं और गांवों में स्वास्थ्य कैंप लगाए गए। लेकिन दूषित हो चुके भूजल की रोकथाम के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है। सीवेज और रासायनिक अपशिष्ट आज भी नदियों में खुलेआम बहाया जा रहा है, जिससे समस्या जस की तस बनी हुई है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, प्रशासनिक सुस्ती को तोड़कर तत्काल प्रभावी कदम उठाना बेहद आवश्यक है ताकि लाखों लोगों के जीवन को बचाया जा सके।
