लखनऊ में मेजर का मकान हथियाने वाले गिरोह का मददगार गिरफ्तार, आवास विकास में कराई थी ‘सेटिंग’
लखनऊ के इंदिरानगर में एक दिवंगत मेजर के मकान को जाली दस्तावेजों के आधार पर वसीयत कराकर हथियाने के गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस गिरोह के एक अहम मददगार सत्यम पांडेय को गाजीपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। सत्यम पर आरोप है कि उसने इस संपत्ति धोखाधड़ी में गिरोह के सरगना बलवंत को लखनऊ की भौगोलिक जानकारी देने के साथ ही आवास विकास में मकान का म्यूटेशन कराने के लिए ‘सेटिंग’ कराई थी। यह घटना आम जनता के बीच संपत्ति सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है।
सत्यम पांडेय मूल रूप से वाराणसी का रहने वाला है और लखनऊ के ओमेक्स अपार्टमेंट में रहता था। चूंकि वह लंबे समय से लखनऊ में रह रहा था, उसकी यहां के सरकारी विभागों में अच्छी पैठ थी। पुलिस पूछताछ में पता चला कि मेजर के मकान पर कब्जा करने के फर्जीवाड़े में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। उसने कई दस्तावेज बनवाने के साथ ही आवास विकास के कर्मचारियों से मिलकर म्यूटेशन की प्रक्रिया को अंजाम दिया था।
एसीपी गाजीपुर अनिद्य विक्रम सिंह के अनुसार, गिरोह के सरगना बलवंत यादव उर्फ बबलू और मनोज यादव को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब चंदौली के शिव जियावन, जौनपुर के सोनू उर्फ स्वामीकांत, राजीव और खुद को मेजर विपिन चंद्र भट्ट बताकर वसीयत करने वाले अज्ञात व्यक्ति की तलाश में पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। सत्यम से मिली जानकारी के आधार पर आवास विकास के कई कर्मचारी भी पुलिस के रडार पर हैं, जिनके खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब मेजर विपिन चंद्र भट्ट की बेटी अंजना, जो सिजोफ्रेनिया से पीड़ित हैं, के मकान पर जालसाजों ने कब्जा कर लिया था। अंजना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर पुलिस कमिश्नर अमरेन्द्र कुमार सेंगर ने 24 घंटे के भीतर मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार करवाया था। इस मामले में लापरवाही बरतने पर एक चौकी प्रभारी को निलंबित भी किया गया था। पुलिस का कहना है कि जल्द ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
