आगरा की फोरेंसिक लैब में माइटोकांड्रिया DNA तकनीक, UP के तीसरे शहर में सुविधा
आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला को माइटोकांड्रिया से डीएनए निकालने की उच्च तकनीकी क्षमता वाले उपकरणों से सुसज्जित किया गया है। यह उत्तर प्रदेश की तीसरी प्रयोगशाला है जहाँ यह विशेष सुविधा उपलब्ध होगी। पहले यह सुविधा केवल लखनऊ और मुरादाबाद की प्रयोगशालाओं में ही थी। इन नए उपकरणों को स्थापित करने का कार्य अगले एक महीने में पूरा कर लिया जाएगा।
आगरा की फोरेंसिक लैब ‘ए’ श्रेणी में आती है, लेकिन इसमें माइटोकांड्रिया से डीएनए प्राप्त करने के लिए आवश्यक उपकरण मौजूद नहीं थे। हाल ही में मथुरा के बल्देव में हुए एक भीषण सड़क हादसे में, जहाँ 19 लोगों की मृत्यु हो गई थी और 15 शवों की पहचान डीएनए के माध्यम से की गई थी, आगरा लैब में परीक्षण के दौरान दो नमूनों से डीएनए निकालने में सफलता नहीं मिली थी।
इन विशेष नमूनों से माइटोकांड्रिया डीएनए निकालने के लिए उन्हें लखनऊ भेजा गया था। इस घटना के बाद आगरा की फोरेंसिक लैब के डीएनए अनुभाग में भी ऐसे उन्नत उपकरणों की तत्काल आवश्यकता महसूस की गई।
फोरेंसिक लैब के संयुक्त निदेशक अशोक कुमार ने इस आवश्यकता को देखते हुए शासन को उपकरणों की खरीद हेतु प्रस्ताव भेजा था। धनराशि स्वीकृत होने के बाद उपकरणों की खरीद की गई और उन्हें इस महीने प्रयोगशाला को प्राप्त हो गए हैं। इन्हें स्थापित करने के बाद यह तकनीक प्रभावी ढंग से काम करना शुरू कर देगी, जिससे जटिल मामलों में भी डीएनए विश्लेषण की क्षमता बढ़ेगी।
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