कानपुर BJP में मेयर-पार्षद विवाद, पार्टी नेताओं ने बताया ‘गलतफहमी’ (Kanpur BJP news)
उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर निगम में मेयर और उन्हीं की पार्टी के पार्षदों के बीच चल रही तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। यह विवाद इतना गहरा गया है कि पार्टी के भीतर धड़ेबंदी साफ दिखाई दे रही है, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता इसे महज ‘गलतफहमी’ बताकर टालने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्थिति तब बनी है जब पार्षदों ने मेयर पर भ्रष्टाचार और उनके बेटे के हस्तक्षेप का आरोप लगाया है।
यह विवाद पिछले डेढ़ साल से सुलग रहा था। पहले जिन दिग्गज पार्षदों की गिनती मेयर के करीबियों में होती थी, वे अब सदन में पिछली सीटों पर बैठने लगे हैं। विवाद की शुरुआत मेयर के बेटे के हस्तक्षेप को लेकर हुई थी। हाल ही में यह मामला तब गरमा गया जब अशोक नगर वार्ड के पार्षद पवन गुप्ता ने सीवर लाइन न बिछाने देने का मुद्दा उठाया। इसके बाद दो पार्षदों को सदन की बैठकों से निलंबित कर दिया गया, जिसके बाद चार अन्य पार्षद उनके समर्थन में आ गए और संगठन से मेयर के बेटे को निगम से दूर रखने की मांग करने लगे।
इस आंतरिक कलह ने अब ‘पोस्टर वार’ का रूप ले लिया है। भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित का एक पुराना पोस्टर वायरल हो रहा है, जिसमें वह तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समर्थन में नारे लगाते दिख रहे हैं। यह पोस्टर ऐसे समय में वायरल हुआ है जब पार्टी के भीतर गुटबाजी चरम पर है।
इस पूरे मामले पर भाजपा के वरिष्ठ नेता चुप्पी साधे हुए हैं या इसे कम आंक रहे हैं। कानपुर सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि यह सिर्फ गलतफहमी है और संगठन जल्द ही दोनों पक्षों को बिठाकर सुलह कराएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी मिशन-2027 के लिए एकजुट होकर काम करेगी। वहीं, एमएलसी सलिल विश्नोई ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि इसे आपस में सुलझा लेना चाहिए। विधायक सुरेंद्र मैथानी ने भी समन्वय बनाकर विकास कार्यों पर असर न पड़ने देने की बात कही। हालांकि, विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि उन्हें निगम में चल रही गतिविधियों की जानकारी नहीं है।
