मथुरा: विकास के नाम पर जलभराव की समस्या, द्वारकेशपुरमवासी परेशान
मथुरा के द्वारकेशपुरम क्षेत्र में चल रहा सड़क और नाली निर्माण कार्य स्थानीय निवासियों के लिए एक बड़ी समस्या का कारण बन गया है। नगर निगम द्वारा 15वें वित्त आयोग से स्वीकृत करीब 24 लाख रुपये के बजट से लगभग 300 मीटर सड़क और 600 मीटर नाली का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। लेकिन, निर्माण की गुणवत्ता और मानकों की अनदेखी के कारण कॉलोनियों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
समस्या का मुख्य कारण यह है कि नई बनाई जा रही नालियों का स्तर पुरानी नालियों और कॉलोनियों की सड़कों से काफी ऊंचा कर दिया गया है। इससे गंदा पानी वापस पुरानी कॉलोनियों के रास्तों में ओवरफ्लो होकर बह रहा है। पहले जहां कॉलोनियों में जलभराव की कोई समस्या नहीं थी, वहीं अब नई नालियों का गंदा पानी घरों तक पहुंचने लगा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ठेकेदार ने अभियंताओं की उदासीनता का फायदा उठाते हुए नालियों का स्तर जरूरत से ज्यादा ऊंचा कर दिया है, जिससे पानी की निकासी रुक गई है।
क्षेत्र के पार्षद अमर सिंह ने बताया कि उन्होंने इंजीनियरों और अधिकारियों से कई बार शिकायत की है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है, कोई कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने चिंता जताई कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो कॉलोनियों को भविष्य में हमेशा जलभराव का दंश झेलना पड़ेगा।
एक निवासी ब्रजलता शर्मा ने बताया कि उनके घर पहले से ही थोड़े नीचे थे, लेकिन अब नगर निगम द्वारा बनाई गई ऊंची नालियों के कारण गंदा पानी उनके घरों में घुस रहा है। उन्होंने इसे विकास के नाम पर भविष्य का नासूर बताया। कमलेश सिंह ने कहा कि सड़क पर नालियों का पानी ओवरफ्लो होकर बहने से आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने नगर निगम से तकनीकी मानकों पर काम कराने की मांग की है।
एक अन्य निवासी चंद्रवती ने बताया कि घरों के सामने हर समय नालियों का गंदा पानी भरा रहता है, जिससे बच्चों में संक्रामक बीमारियों के फैलने और कीड़े-मकोड़ों की समस्या बढ़ गई है। उन्होंने भी कई बार अधिकारियों से शिकायत की है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला है। राजेश कुमार के अनुसार, नई सड़क और नाली निर्माण में तकनीकी लापरवाही बरती जा रही है। नालियों का लेवल आसपास की पुरानी नालियों से मिलान किए बिना किया गया है, जिससे ढलान उल्टा हो गया है और समस्या बढ़ती ही जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान कोई भी इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं रहता, जिससे ठेकेदार मनमर्जी से काम कर रहा है। यदि कार्य की सही निगरानी होती तो नालियां सही स्तर पर बनतीं और यह समस्या उत्पन्न नहीं होती। अब अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा स्थानीय निवासियों को भुगतना पड़ रहा है।
