मदरसे को बंद नहीं कर सकते: मान्यता न होने पर HC का बड़ा आदेश, 24 घंटे में सील हटाने का निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बिना मान्यता के संचालित हो रहे मदरसों के संबंध में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ मान्यता का अभाव किसी मदरसे को बंद करने का वैधानिक आधार नहीं है। इस फैसले के तहत, श्रावस्ती के मदरसा अहले सुन्नत इमाम अहमद रजा पर लगी सील को 24 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने मदरसा प्रबंधन की याचिका पर दिया।
याचिका में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, श्रावस्ती के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मदरसा बंद करने का निर्देश दिया गया था। राज्य सरकार ने दलील दी थी कि बिना मान्यता के चलने वाले मदरसों के छात्रों को भविष्य में शैक्षणिक लाभ मिलने में कठिनाई हो सकती है। हालांकि, न्यायालय ने कहा कि नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो केवल मान्यता के अभाव में मदरसे का संचालन रोक सके।
अदालत ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी का मदरसा बंद करने का आदेश निरस्त कर दिया। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया कि जब तक मदरसा मान्यता प्राप्त नहीं कर लेता, तब तक वह सरकारी अनुदान का दावा नहीं कर सकेगा और न ही मदरसा शिक्षा बोर्ड के छात्र बोर्ड परीक्षा में बैठने के पात्र होंगे। साथ ही, ऐसे मदरसे से प्राप्त योग्यता राज्य सरकार की किसी भी योजना के लाभ के लिए मान्य नहीं होगी।
इस फैसले को उन हजारों गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिन पर हाल ही में कार्रवाई की तलवार लटक रही थी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने शिक्षा प्रदान करने की स्वतंत्रता और प्रशासनिक नियंत्रण के बीच एक संतुलन स्थापित किया है।
यह फैसला मदरसा संचालकों के लिए एक चेतावनी भी है कि बिना मान्यता के वे केवल एक निजी संस्था के रूप में ही कार्य कर सकते हैं। उन्हें बोर्ड से मान्यता और छात्रों की डिग्रियां सरकारी नौकरियों के लिए मान्य नहीं होंगी। मदरसा प्रबंधन को अब अपने छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए जल्द से जल्द सरकारी मानकों को पूरा कर मान्यता प्राप्त करनी होगी।
