अलीगढ़ में महिला सशक्तिकरण की मिसाल, छह थानों की कमान अब महिलाओं के हाथ
पुलिस विभाग में महिला सशक्तिकरण की एक नई और प्रेरणादायक तस्वीर अलीगढ़ से सामने आई है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार जादौन ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए जनपद के छह थानों की कमान महिला अधिकारियों को सौंपी है। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में महिला पुलिस अधिकारी थानेदार के रूप में अपनी सेवाएं देंगी। इस कदम को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे न केवल महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है, बल्कि समाज में महिलाओं के प्रति पारंपरिक सोच को भी चुनौती मिली है।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद महिला थानेदारें पूरे उत्साह और लगन के साथ अपने कार्यों में जुट गई हैं। उन्होंने पहले दिन से ही अपने-अपने थानों में मोर्चा संभाल लिया है और कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ जनता की समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर हैं। इन अधिकारियों का मानना है कि यह अवसर उन्हें अपनी क्षमताओं को साबित करने और समाज में महिलाओं के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करने का मौका देगा।
एक नई थानेदार ने बताया कि बच्चों की देखभाल के साथ ड्यूटी की जिम्मेदारी निभाना एक चुनौती हो सकती है, लेकिन यह अस्थायी है। वर्ष 2017 बैच की अधिकारी के तौर पर उन्हें पूर्व में भी ऐसे अनुभव रहे हैं, जो इस नई भूमिका में मददगार साबित होंगे। उन्होंने कहा, ‘हम अपने काम से महिलाओं के आत्मविश्वास को और बढ़ाने की जिम्मेदारी को भी बखूबी ध्यान रखेंगे।’ आगरा की निवासी यह अधिकारी महिला थाने से स्थानांतरित होकर नई जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
इसी क्रम में, वर्ष 2018 बैच की एक अन्य अधिकारी, जो फिरोजाबाद की रहने वाली हैं, उन्हें पिसावा थाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि थाने में टीम का नेतृत्व करने का उनका एक वर्ष का अनुभव है, जो इस नई भूमिका में काम आएगा। उनका मानना है कि चुनौतियों को अपने काम को बेहतर और समझदारी से पूरा करके निपटा जा सकता है।
गोधा थाने की नई प्रभारी, जो पहले महिला थाना की नंदनी चौकी प्रभारी रह चुकी हैं, ने कहा कि यह बड़ी जिम्मेदारी उन्हें बहुत कुछ सिखाएगी और उनके भीतर और अधिक गंभीरता लाएगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को जिम्मेदारियां मिलना उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला कदम है, जिसे पूरी ईमानदारी और लगन से निभाना उनका कर्तव्य है।
दादों थाने की प्रभारी, वर्ष 2001 बैच की अधिकारी, जो इटावा की रहने वाली हैं, के लिए यह जिले में तीसरा अवसर है। उन्होंने पूर्व में गोधा और महिला थाने में भी प्रभारी की भूमिका निभाई है। वह पूरे आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ इस नई भूमिका को निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
सहारनपुर, नोएडा, आगरा, मथुरा आदि जिलों में विभिन्न जिम्मेदारियों का अनुभव रखने वाली एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआत में जब बेटे छोटे थे तब थोड़ी दिक्कत आई थी, लेकिन परिवार के सहयोग से उन्होंने हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया है। विभिन्न जिलों के अनुभव ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया है।
मध्य प्रदेश के भिंड जिले से ताल्लुक रखने वाली वर्ष 2012 बैच की एक अधिकारी, जिन्होंने आगरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी में चौकी प्रभारी के तौर पर काम किया है, ने कहा कि हर जिम्मेदारी में उन्होंने खुद को साबित करने का प्रयास किया है। इससे उन्हें हमेशा ऊर्जा मिली है और वे आगे भी इसी ऊर्जा के साथ काम करती रहेंगी।
यह पहल न केवल पुलिस महकमे में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करती है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बनती है। यह साबित करता है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं हैं और उन्हें समान अवसर मिलने पर वे उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।
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