कानपुर: जिस जमीन के लिए 50 साल लड़े वकील, वह 1985 में ही बिक चुकी थी; बेटे को मिला नोटिस
कानपुर में एक अधिवक्ता परिवार के साथ हुए बड़े land fraud का मामला सामने आया है। अधिवक्ता राजाराम वर्मा जिस जमीन के लिए पांच दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ते रहे, वह जमीन वास्तव में वर्ष 1985 में ही बिक चुकी थी। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद उनके बेटे नरेंद्र देव ने पुलिस आयुक्त से शिकायत की है।
नरेंद्र देव के मुताबिक, उन्हें हाल ही में महाराजपुर नायब तहसीलदार का एक नोटिस मिला, जिसमें उनकी संपत्ति के दाखिल खारिज की जानकारी थी। इससे पहले, उन्हें राकेश तिवारी नामक व्यक्ति ने बताया था कि उनके पिता ने 1985 में ही यह जमीन लखनऊ निवासी दिनेश सिंह संतोषी को बेच दी थी। दिनेश ने बाद में इसका एक बड़ा हिस्सा आर्यनगर निवासी अनिल गुप्ता को बेच दिया। नरेंद्र ने पहले इसे गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन नोटिस मिलने के बाद उन्हें अपनी संपत्ति हाथ से जाने का डर सताने लगा। उन्होंने बताया कि जांच करने पर पता चला कि दिनेश सिंह संतोषी की मौत हो चुकी है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो इंस्पेक्टरों को जांच में लगाया है। जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। सबसे पहले, यह सवाल उठा है कि जब जमीन का क्षेत्राधिकार बिठूर का है, तो नोटिस महाराजपुर नायब तहसीलदार द्वारा कैसे जारी हुआ। इसके अलावा, तहसील के दस्तावेजों की जांच में थंब इंप्रेशन (टीआई) का पन्ना फटा मिला है। रजिस्टर की क्लोजिंग और ओपनिंग रिपोर्ट के पन्ने भी फटे हुए हैं, और रजिस्ट्री दर्ज करने के क्रम में भी बदलाव पाया गया है।
पुलिस आयुक्त ने बताया कि राकेश तिवारी को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। उनके खाते से अप्रैल 2022 में रेखा वर्मा को पांच ट्रांजेक्शन किए गए थे। पुलिस अब राजाराम की मौत से पहले और बाद में हुई रजिस्ट्रियों पर सवाल-जवाब करने की तैयारी कर रही है। पुलिस आयुक्त ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
