कानपुर-भोपाल इकोनॉमिक कॉरिडोर को रफ्तार: 25 को खुलेंगे टेंडर, 5757 करोड़ की परियोजना
कानपुर और भोपाल के बीच बनने वाला इकोनॉमिक कॉरिडोर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की दो राजधानियों को जोड़ेगा, जिसका सबसे बड़ा लाभ कानपुर को मिलने की उम्मीद है। भारतमाला परियोजना के तहत विकसित हो रहे इस कानपुर-कबरई एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड हाईवे से लखनऊ से भोपाल तक की लगभग 600 किलोमीटर की दूरी को केवल सात घंटे में तय किया जा सकेगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 5757 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए टेंडर जारी कर दिया है। 25 जून को NHAI मुख्यालय में टेंडर खोले जाएंगे, जिसके बाद कार्यदायी संस्था का चयन किया जाएगा।
यह नया हाईवे रिंग रोड में रमईपुर के पास मगरासा से शुरू होकर लगभग 118 किलोमीटर लंबा होगा और कानपुर नगर, कानपुर देहात, हमीरपुर और महोबा जिलों से होकर गुजरेगा। इसे इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि भारी ट्रैफिक शहर के मुख्य हिस्सों में प्रवेश किए बिना सीधे बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश की ओर निकल सके। NHAI इस परियोजना को केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि हाईवे के दोनों किनारों पर औद्योगिक और लॉजिस्टिक जोन विकसित करने की भी योजना है। इससे कानपुर के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी, फैक्ट्रियों तक कच्चे माल की आपूर्ति सुगम होगी और तैयार उत्पादों की देश भर में सप्लाई आसान हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर कानपुर के डिफेंस, टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं खोलेगा।
यह ग्रीनफील्ड हाईवे रमईपुर के मगरासा में मौजूदा रिंग रोड से जुड़ेगा, जो पहले से ही कानपुर से गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को आपस में जोड़ रही है। इस कनेक्टिविटी से प्रयागराज, वाराणसी, दिल्ली, अलीगढ़, कन्नौज, फर्रुखाबाद और झांसी जैसे शहरों तक सीधी और तेज पहुंच संभव होगी। इसके अतिरिक्त, बुंदेलखंड से आने वाले भारी वाहनों के लिए यह नया मार्ग शहर के अंदर ट्रैफिक के दबाव को कम करेगा, जिससे मौरंग और गिट्टी जैसे कारोबार को भी लाभ मिलेगा।
तकनीकी प्रक्रिया और संशोधित डिजाइन के कारण टेंडर प्रक्रिया में लगभग चार महीने की देरी हुई थी। अब टेंडर जारी होने के बाद निर्माण एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। इस परियोजना को लगभग 910 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मौजूदा कानपुर-हमीरपुर मार्ग पर भारी ट्रैफिक और ओवरलोड वाहनों के कारण अक्सर होने वाले सड़क हादसों में कमी आने की उम्मीद है, क्योंकि लंबी दूरी का ट्रैफिक नए हाईवे पर स्थानांतरित हो जाएगा।
कानपुर के परियोजना निदेशक पंकज यादव के अनुसार, कानपुर-कबरई हाईवे की टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है और यह भारतमाला परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कॉरिडोर में बेहतर कनेक्टिविटी के कारण आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और कानपुर के औद्योगिक स्वरूप का विस्तार होगा।
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