राम मंदिर प्रबंधन: देवकीनंदन ठाकुर की सलाह, शंकराचार्य के नेतृत्व में बने सनातन बोर्ड
अयोध्या राम मंदिर के प्रबंधन को लेकर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने मांग की है कि मंदिर के संचालन से सरकारी अधिकारियों को हटाकर, इसकी व्यवस्था धर्मज्ञ लोगों के एक सनातन बोर्ड के हाथों में सौंपी जाए। ठाकुर के अनुसार, यदि मंदिर का प्रबंधन ऐसे लोगों के पास होता जो धर्म और शास्त्रों के ज्ञाता हैं, तो चढ़ावे की चोरी जैसी घटनाएं नहीं होतीं। उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि राम मंदिर के निर्माण के कुछ ही समय बाद इस तरह के विवाद सामने आ रहे हैं।
देवकीनंदन ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमें भगवान राम का मंदिर बनाए गिने-चुने कुछ दिन हुए हैं और हम इन विषयों में पड़ गए हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सनातन बोर्ड का गठन होना चाहिए और मंदिर का अधिकारी सरकारी अधिकारियों को बनाना उचित नहीं है। उनके अनुसार, धर्मज्ञ लोग जानते हैं कि मंदिर के धन का दुरुपयोग करने वाले को शास्त्रों के अनुसार गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं, जबकि अज्ञानी व्यक्ति ऐसे कृत्यों से नहीं डरता।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों के संदर्भ में, देवकीनंदन ठाकुर ने सनातन बोर्ड के तहत मंदिर को लाने की वकालत की। उन्होंने कहा, “हम अभी भी कह रहे हैं कि सनातन बोर्ड बने और धर्म के मर्मज्ञ लोगों के हाथों में धर्म और सनातन की व्यवस्था होनी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि अन्य धर्मों में अधिकारियों का हस्तक्षेप नहीं होता, तो हिंदू धर्म में क्यों हो। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रार्थना की कि राम मंदिर से ही इसकी शुरुआत हो और चार शंकराचार्यों में से किसी एक को सनातन बोर्ड का अध्यक्ष बनाया जाए।
कथावाचक ठाकुर ने यह भी कहा कि जिसने भी चोरी की है, उसे अपनी गलती मानकर धन रामजी को वापस कर देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऐसे व्यक्ति को तुरंत पद से हटाकर, चोरी किए गए धन को बरामद कर रामजी को वापस किया जाना चाहिए, यही न्याय है। इस तरह के कदम से न केवल व्यवस्था सुधरेगी बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था का भी सम्मान होगा।
