कानपुर में आयकर संग्रह पर चिंता, एडवांस टैक्स और टीडीएस में बड़ी गिरावट
कानपुर शहर, जो आमतौर पर आयकर संग्रह में अग्रणी रहता है, इस वित्तीय वर्ष में एक चिंताजनक स्थिति का सामना कर रहा है। 15 दिसंबर को एडवांस टैक्स की तीसरी किस्त जमा करने की अंतिम तिथि के बावजूद, शहर में एडवांस टैक्स संग्रह में 18.93% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह स्थिति केवल एडवांस टैक्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि टीडीएस (टैक्स डिडेक्टेड एट सोर्स) संग्रह में भी 3.32% की नकारात्मक वृद्धि देखी गई है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, आयकर अधिकारियों ने मर्चेंट्स चैंबर सभागार में एक आउटरीच कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें शहर के उद्यमियों और कारोबारियों को संबोधित करते हुए कर संग्रह के लक्ष्य को पूरा करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में बताया गया कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 35% और प्लास्टिक उद्योग में 26.71% की गिरावट एडवांस टैक्स संग्रह को प्रभावित कर रही है। कुल मिलाकर, अब तक 7.7 करोड़ रुपये का एडवांस टैक्स एकत्र हुआ है, जो चिंताजनक है।
संयुक्त आयकर आयुक्त (टीडीएस) शुभी मिश्रा ने उद्यमियों को 31 दिसंबर 2025 से पहले विदेश में अपनी संपत्ति की जानकारी विभाग को देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विभाग के पास पहले से ही ऐसी संपत्तियों की जानकारी है और इसके आधार पर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि शहर के उद्यमी और कारोबारी कर लक्ष्यों को पूरा करने में सहयोग करेंगे।
हालांकि, उद्यमियों ने कुछ व्यावहारिक समस्याओं को भी उजागर किया। एक उद्यमी ने सवाल उठाया कि आखिर शहर से उद्योग बाहर क्यों जा रहे हैं, जिसका असर कर संग्रह पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कानपुर के उद्यमी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और दुबई जैसे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। एक अधिवक्ता ने आधारभूत ढांचे की कमी और विभाग के पोर्टल तथा ओटीपी प्रणाली की जटिलताओं को भी एक चुनौती बताया।
पश्चिम उत्तर प्रदेश उत्तराखंड की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त अपर्णा करण ने करदाताओं से गलत तरीके से छूट लेने और विदेश में संपत्ति छिपाने से बचने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग के पास ऐसी गतिविधियों की जानकारी है और वह कड़ी कार्रवाई से बचना चाहता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम उत्तर प्रदेश उत्तराखंड क्षेत्र के लिए 44 हजार करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित है, ऐसे में एडवांस टैक्स और टीडीएस में नकारात्मक वृद्धि स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने पान मसाला उद्योग से कर संग्रह में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया, क्योंकि इस क्षेत्र से काफी राजस्व उत्पन्न होता है और इसका एक बड़ा हिस्सा स्थानीय विकास में योगदान देता है।
इस कार्यक्रम में मर्चेंट्स चैंबर, कानपुर इनकम टैक्स बार एसोसिएशन, कानपुर चार्टर्ड अकाउंटेंट सोसाइटी तथा नेशनल डायरेक्ट टैक्स ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन ने सहयोग किया। इस दौरान विभिन्न आयकर अधिकारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने भी अपने विचार रखे।
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